नैमिष चक्रतीर्थ में डुबकी लगाते श्रद्धालु।
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पितृ विसर्जन अमावस्या पर देश के विभिन्न प्रांतों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र चक्रतीर्थ व गोमती में डुबकी लगाकर पितरों को विदा किया। दान-पुण्य के साथ ही लोगों मां ललिता देवी के अलावा तीर्थ के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद मांगा।
पुरखों के मोक्ष की कामना लेकर पितृपक्ष के अंतिम दिन बुधवार को पितृ विर्सजन अमावस्या पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचे। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार शाम से ही शुरू हो गया था।
बुधवार भोर 3 बजे से ही श्रद्धालु चक्रतीर्थ व गोमती में स्नान करने लगे। स्नान के बाद अपने पितरों की मुक्ति और तृप्ति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया। इसके लिए पितृपक्ष का अंतिम दिन होने के चलते इस पर्व का महत्व और बढ़ जाता है।
मान्यता है, कि पितृपक्ष में जो अपने पितरों के लिए तर्पण या श्राद्ध नहीं कर पाता है उसे अंतिम दिन तर्पण श्राद्ध करके पितृ ऋण से मुक्त होने का मौका मिलता है। इस दौरान दान-पुण्य कर आदि शक्ति मां ललिता देवी के साथ ही नैमिष तीर्थ के प्रसिद्ध देव स्थलों हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, शौनक गद्दी, काली पीठ, देवदेवेश्वर आदि में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। अल सुबह से स्नान-दान और दर्शन-पूजन का शुरू हुआ क्रम देर शाम तक जारी रहा।