वासंतिक नवरात्र के दूसरे दिन शनिवार को जिले भर के देवी मंदिर ‘या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि रूपेण संस्थिता...’ मंत्र से गुंजायमान रहे। देवी भक्तों ने मां भगवती के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और ज्ञान, बुद्धि व विवेक प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगा। बड़ी तादाद में भक्तों ने उपवास रखकर मां की अराधना की।
मंदिरों में भी मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का सुबह से लेकर देर शाम तक तांता लगा रहा। विश्व विख्यात धार्मिक नगरी नैमिषारण्य में ललिता देवी मंदिर में मां का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा।
शहर के मोहल्ला गदियाना स्थित दुर्गा मंदिर, पंजाबी धर्मशाला मंदिर, संतोषी माता मंदिर, काली मंदिर, सहगल धर्मशाला मंदिर, मां फूलमती मंदिर, नव दुर्गा मंदिर पर पूरे दिन भक्तों का तांता लगा रहा। शाम को विभिन्न मंदिरों में संध्या पूजन और आरती का भी आयोजन किया गया।
नवरात्र पर्व पर नैमिषारण्य के काली पीठ में शनिवार को मां धूमावती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की जबर्दस्त भीड़ उमड़ी। इस दिन दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने मां धूमावती का पूजन-अर्चन कर उनके दर्शन किए। सुबह से शुरू दर्शन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। माता के जयकारों से समूचा वातावरण भक्तिमय रहा।
मालूम हो कि नवरात्र के शनिवार को ही माता धूमावती के पट खोले जाते हैं और तभी उनके दर्शन संभव हैं। नैमिषारण्य काली पीठ स्थित माता धूमावती का एक मात्र मंदिर है। शनिवार की सुबह काली पीठ के संस्थापक जगदम्बा प्रसाद की अगुवाई में आचार्य ने माता धूमावती का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक कर श्रृंगार किया और आरती की।
बाद में माता का दरबार दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया। इस दिन श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर उन्हें धार्मिक मान्यता के अनुरूप काले तिल की पोटली व नारियल का गोला अर्पित किया और मन्नतें मांगी। सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु की कामना की। काली पीठ के पीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री ने भी मां की महिमा का गुणगान किया।
उन्होंने बताया कि इस दिन की प्रतीक्षा सभी श्रद्धालुओं को छह माह से रहती है। काली पीठ के संस्थापक भास्कर शास्त्री ने बताया कि परम्परा है कि सुहागिनें मां धूमावती का पूजन नहीं करती हैं। वह केवल दूर से ही मां के दर्शन कर सकती हैं। मां धूमावती के दर्शन से सुहागिनों का सुहाग अमर हो जाता है। पुत्र और पति की रक्षा के लिए दर्शन अवश्य करने चाहिए।