पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस पानी की वजह से गांजर में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने से लोग गांवों में फंसे हैं। घरों में भी ढाई से तीन फीट तक पानी भरा है।
इससे बाढ़ पीड़ितों के सामने संकट और गहरा गया है। कोनी गांव का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है, जबकि पचीसा गांव पहले से ही अलग-थलग पड़ा है। गुरुवार को घाघरा व शारदा बैराजों से एक बार फिर सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे संकट टलता नजर नहीं आ रहा है।
रेउसा क्षेत्र के कोनी, गोड़ियनपुरवा, रामलाल पुरवा, मरेली, ठेकेदार पुरवा, फौजदार पुरवा, पासिन पुरवा, श्याम नगर, सुंदर नगर, नगीना पुरवा, जैतहिया समेत 60 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अधिकतर गांवों में घाघरा कहर बरपा रही है। इनमें से 20 गांवों में शारदा का कहर है।
कोनी गांव को पानी ने चारों तरफ से घेर रखा है, इससे मुख्यालय से उसका संपर्क टूट गया है। क्षेत्र के सारे संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। घरों में तीन फीट तक पानी भरा है। लोग छत पर शरण ले रखे हैं। कोनी गांव में हैंडपंप न होने से लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। पचीसा गांव में भी हालात खराब हो रहे हैं।
सरकारी मदद का हाल यह है कि प्रशासन ने मारूबेहड़ में राहत कैंप लगा रखा है। जबकि ग्रामीण गांव से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। पचीसा गांव से बाहर आने के लिए करीब 7 किमी. की दूरी पानी में तय करनी पड़ेगी। उफनाते पानी में लोग नाव उतारने से कतरा रहे हैं।
रामपुर मथुरा के हालात भी बदहाल होते जा रहे हैं। यहां भी घाघरा का कहर है। क्षेत्र के अंगरौरा, कनरखी, नयापुरवा, भगवतपुर, शुक्लनपुरवा, जगतूपुरवा, कामजापुरवा, अर्जुनपुरवा, बालेसर पुरवा, हरीपुरवा, भंडारीपुरवा आदि 48 गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता जा रहा है। इन गांवों के लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। उधर, घाघरा व शारदा बैराजों से गुरुवार को 2,39,459 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे स्थिति और भी बिगड़ सकती है।