बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी की वजह से जिले के गांजर इलाके में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। घाघरा की कटान तेज हो गई है। यही वजह है कि घाघरा का भयावह रूप देख, लोग खुद ही आशियानों पर हथौड़ा चला रहे हैं।
मंशा है कि कुछ न सही, ईंट ही बचा लें। ताकि दोबारा फिर से सपनों का महल खड़ा हो सके। क्षेत्र के बाशिंदे कटान के भय से सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। पचीसा टापू के दो घर कटकर घाघरा में बह गए हैं। जबकि रेउसा में करीब 80 बीघा ग्राम समाज की जमीन तो रामपुर मथुरा में 14 बीघा खेती कटकर घाघरा में बह गई।
रेउसा में बाढ़ के हालात जस के तस बने हुए हैं। 13 गांव बाढ़ की चपेट में है। वहीं घाघरा नदी कोनी, दुर्गा पुरवा, गोड़ियन पुरवा, पासिनपुर में कटान कर रही है। गुरुवार रात 80 बीघा ग्राम समाज की जमीन कटकर नदी में बह गई।
दुर्गापुरवा में रामपाल व गोड़ियन पुरवा में शीलू का घर कटान के मुहाने पर है। इस वजह से रामपाल व शीलू के परिवारों ने मकान पर हथौड़ा चलाना शुरू कर दिया। इन लोगों का कहना है कि कुछ न सही, लेकिन घर की ईंटें ही बचा ली जाएं। ये ईंट सड़क पर आशियाना बनाते समय काम आएंगी।
इसी तरह से अन्य बाशिंदे अपने आशियानों पर खुद ही हथौड़ा चला रहे हैं। कोई दीवार तोड़ रहा है, तो कोई छप्पर उठाकर सड़क की तरफ जा रहा है। हर किसी को अपनी गृहस्थी का सामान बचाने की चिंता है।
टापू पर बसे भिम्मा व रामदास के घर गुरुवार रात कटकर घाघरा की धार में बह गए। गांव के संतराम, दिनेश व हरद्वारी के घर कटान के मुहाने पर हैं। घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से शुक्रवार को एक बार फिर से 2,88,134 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इससे हालात भयावह हो सकते हैं। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा पंडित पुरवा गांव में तेजी से कटान कर रही है। यहां के शिव भगवान, ब्रज नरेश, शिव नरेश, अवध नरेश, राम दशरथ की 14 बीघा खेती नदी में समा गई है। नदी पंडित पुरवा गांव की तरफ बढ़ रही है।