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Sitapur News: एक महीने में मरीजों को मिलनी शुरू हो जाएगी प्लेटलेट्स

Tue, 13 Jun 2023 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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सीतापुर। जिला अस्पताल से मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अस्पताल की सुविधाओं में एक और इजाफा होने वाला है। ब्लॅड सेंटर में कंपोनेंट सेपरेटर मशीन जल्द प्रारंभ हो जाएगी। जिला अस्पताल ने मशीनें आने के बाद अब लाइसेंस के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में आवेदन कर दिया है। अब किसी भी दिन दिल्ली की टीम आकर मुआयना करते हुए लाइसेंस की प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी।
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डेंगू से पीड़ित मरीजों की जब लगातार प्लेटलेट्स गिरने लगती है तो उन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता होती है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गौरव मिश्रा बताते है मरीज की अगर 30 हजार से नीचे प्लेटलेट्स आ जाती है तो खतरा बढ़ने लगता है। ऐसे में उसे प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके लिए जिला अस्पताल में कंपोनेंट सेपरेटर लगाए जाने की करीब दो साल पहले कवायद प्रारंभ हुई थी। अब यह मशीनें आ गई है। अब लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू दी गई है। एफएसडीए की टीम आकर मौका मुआयना करते हुए लाइसेंस दे देगी। इसके बाद होल ब्लड से प्लेटलेट्स निकालने का काम शुरु हो जाएगा। इसका सबसे अधिक फायदा उन मरीजों को होगा जो अभी तक प्लेटलेट्स चढ़वाने के लिए करीब 85 किलोमीटर दूर चलकर लखनऊ जाते थे। अब जिले में ही इसकी सुविधा होने से उनकी भागदौड़ बचेगी। साथ ही जिला अस्पताल में डेंगू जैसे गंभीर मरीजों का इलाज आसान हो जाएगा।



जरूरत के अनुसार मिलेगी सुविधा

जिला अस्पताल के ब्लड सेंटर से अभी तक होल ब्लड की ही सुविधा है। अब कंपोनेंट सेपरेटर लग जाने से ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा व पीआरबीसी अलग-अलग किया जाएगा। इससे मरीजों केे शरीर में जो भी जरूरत होगी। वहीं चढ़ाया जाएगा। डॉ. पूजा यादव ने बताया डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती हे। एनीमिया व एक्सीडेंट में घायल लोगों को प्लाज्मा की जरूरत पड़ती है। अब यह सुविधा मिलनी शुरु हो जाएगा।
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ट्रेनिंग पूरी, अब मशीनें चलने की देरी

इस कंपोनेंट सेपरेटर के लिए शासन ने तीन सदस्यीय टीम को ट्रेनिंग देकर निपुण कर दिया है। ब्लॅड सेंटर प्रभारी डॉ. पूजा यादव, एलटी आरिफ अंसारी व एसएलटी संतोष कुमार गौतम को ट्रेनिंग दी गई है। अब यह लोग लाइसेंस के बाद काम प्रारंभ कर देंगे।

इनसेट

पांच दिन जीवित रहती है प्लेटलेटस

कंपोनेंट सेपरेटर लगने के बाद डिमांड के अनुसार ही प्लेटलेट्स निकालने का काम होगा। कारण यह है ब्लड 35 दिन तक सुरक्षित रहता है। उसके बाद वह खराब हो जाता है। इसी तरह होल ब्लड से प्लेटलेट्स निकालने के बाद यह पांच दिन ही प्लेटलेट्स जिंदा रहती है। ऐसे में यह खराब न हो, इसके लिए डिमांड के अनुसार ही प्लेटलेट्स निकाली जाया करेंगी।
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इनसेट

कर दिया आवेदन

मशीनें आ गई है। ट्रेनिंग भी पूरी हो गई है। लाइसेंस का आवेदन हो चुका है। अब टीम आने का इंतजार हो रहा है। इससे उम्मीद है जल्द यह सुविधा शुरु हो जाएगी।

डॉ. पूजा यादव, प्रभारी जिला ब्लॅड सेंटर
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