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खटिया पर टांग कर मरीजों को ले जाते अस्पताल

Fri, 11 Aug 2017 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बाढ़ - फोटो : amar ujala
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 बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से गांजर में मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां के करीब 400 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है। बावजूद इसके जलस्तर में कोई गिरावट नजर नहीं आ रही है। लोग गांवों में फंसे हुए हैं। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों को अस्पताल तक ले जाने में हो रही है।
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शुक्रवार को भी बैराजों से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इससे मुसीबत और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। बाढ़ का पानी रेउसा कस्बे की तरफ बढ़ रहा है। दो दिन पहले जो पानी रेउसा कस्बे से डेढ़ किलोमीटर दूर था। अब वह सवा किलोमीटर ही दूर बह रहा है। रेउसा के 400 गांव जबरदस्त तरीके से बाढ़ की चपेट में हैं। हालत ये है कि बाढ़ का जायजा लेने निकले अधिकारी बहराइच हाईवे पर ही ठहर कर रह जाते हैं।

घरों में 3 से 4 फीट तक पानी हिलोरे मार रहा है। जिनके मकान पक्के हैं, उन्होंने छतों पर शरण ले रखी है। बहुत से ऐसे परिवार हैं, जो सरकारी स्कूलों, पंचायत भवनों की छतों पर डेरा जमाए हैं। वहीं घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में जबरदस्त तरीके से बाढ़ कहर बरपा रही है। टापू में फंसे परिवार पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं। टापू से बाहर निकालने में नावें जवाब देती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि घाघरा में उठती लहरों को देख लोग भयभीत हैं।
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एसडीएम दीपेंद्र यादव बाढ़ग्रस्त इलाके में कैंप कर बाढ़ पीड़ितों का हाल जान रहे हैं। बाढ़ के हालात इतने भयावह हैं कि प्रशासनिक अधिकारी चाहकर भी पचीसा टापू पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। अधिकांश परिवारों के घरों में राशन समाप्त हो चुका है। हालांकि प्रशासन बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने के दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत यह भी है कि तमाम परिवारों तक मदद तो दूर प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी तक ही नहीं पहुंच सके हैं।

उधर, घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से शुक्रवार को 4,02,908 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। बीमार पड़े तो समझों आई मुसीबत बाढ़ में सबसे बुरी हालत तो उन परिवारों की है, जिनके घर के सदस्य बीमार हैं। हालत यह है कि बीमार लोगों को न तो अस्पताल ले जा पा रहे हैं और न ही उन्हें घर में रख पा रहे हैं। चमारन पुरवा गांव भी बाढ़ की चपेट में है। यहां के निवासी मिश्रीलाल इन दिनों बीमार पड़े हैं।

घर व गांव में घुटनों तक पानी भरा हुआ है, ऐसे में मिश्री लाल को घर में भी रख पाना मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को परिवार के सदस्य बीमार मिश्रीलाल को चारपाई पर लिटाकर बाढ़ के पानी में पैदल ही मारू बेहड़ कस्बे के लिए रवाना हो गए। बाढ़ इतनी जबरदस्त है कि गांव जाने वाले संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। ऐसे में एंबुलेंस सेवा मिल पाना मुश्किल है। नतीजा लोगों ने उसे पैदल ही बाढ़ के पानी से निकालने की ठान ली और इलाज के लिए चल दिए।

उधर, पचीसा टापू पर हरद्वारी, अमित, सुमित, अनुज आदि बच्चे भी बीमार पड़े हैं। इन बच्चों को टापू से निकाल पाना मुसीबत मोल लेने के बराबर है। नतीजा बच्चों को वहीं रखा गया है। बैराजों से छोड़ा गया पानी घाघरा बैराज 1,28,600 क्यूसेक शारदा बैराज 1,49,878 क्यूसेक बनबसा बैराज 1,24,430 क्यूसेक बाक्स शारदा भी बरपा रही कहर जहां घाघरा ने रेउसा क्षेत्र में कहर बरपा रखा है।   वहीं शारदा भी कहर बरपाने लगी है। कम्हरिया शेखूपुर गांव के निकट शारदा नदी जबरदस्त तरीके से कटान कर रही है। कम्हरिया शेखूपुर के मिश्री लाल की 7 बीघा खेत कटकर नदी में समा गया। इससे गांव के अन्य किसान भयभीत हैं।
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