होली सोमवार को है। इसको लेकर महार्षि दधीचि नगरी मिश्रिख में भी होली का रंग नजर आने लगा है। श्रद्धालु रविवार को इस नगरी से अपने घरों के लिए कूच करते नजर आए।
कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर तो कोई प्राइवेट बस में सवार होकर अपने घर को जा रहा था। हालांकि साधु व संत अभी इस मेले से कूच नहीं करेंगे। वे मिश्रिख होली परिक्रमा मेले में होलिका दहन करने के बाद ही यहां से अपने आश्रम, मठ व मंदिरों के लिए कूच करेंगे।
श्रद्धालुओं ने धर्म नगरी से घर वापस जाने से पहले, महार्षि दधीचि कुंड में स्नान किया, इस तपोभूमि को प्रणाम किया और अगले वर्ष फिर आने का वादा कर वे घरों को रवाना हुए। इस दौरान मेला स्थल से भीड़ बड़ी तेजी से छंटती नजर आई।
रविवार की भोर होते ही मिश्रिख की धरती से जत्थों में श्रद्धालुओं की वापसी होने लगी थी। मिश्रिख सिधौली, मिश्रिख हरदोई, मिश्रिख सीतापुर, मिश्रिख पिसावां मार्गों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार श्रद्धालु फर्राटा भरते हुए अपने घरों को जा रहे थे।
9 मार्च को 84 कोसी परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं का रेला मिश्रिख की धरती पर पहुंचा था। जिसके बाद श्रद्धालुओं ने यहां पर डेरा डाल दिया और पंच कोसी परिक्रमा में जुट गए थे। मिश्रिख की धरती पर तब से रविवार तक श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता ही जा रहा था।
लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पंच कोसी परिक्रमा कर रहे थे। इसी धरती पर साधु, संत, महंत व श्रद्धालु रामधुन में जुटे हुए थे। श्रद्धालुओं ने चूल्हे बना रखे थे और उस पर भोजन तैयार हो रहा था।
महंतों के पंडालों के बाहर भी भंडारा तैयार हो रहा था। जबकि संत व महंत तप में मगन थे। पंच कोसी परिक्रमा स्थल ने मेले का रूप ले लिया था, जिसमें झूले, सर्कस आदि मनोरंजन के साधन भी मौजूद थे। परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं के बच्चे इस मेले में मनोरंजन का भरपूर आनंद ले रहे थे।
श्रद्धालुओं ने मेले से जरूरी सामान की खरीददारी भी की थी। 9 मार्च से 11 मार्च तक मेले में खूब भीड़ उमड़ी। जिसके बाद रविवार की भोर होते ही श्रद्धालुओं ने मिश्रिख की धरती से अपने घरों के लिए कूच कर दिया।
भोर से ही मिश्रिख में उमड़ा जन सैलाब छटने लगा था। श्रद्धालुओं ने पहले अपने तंबू समेटे, उसके बाद महार्षि दधीचि कुंड जाकर तीर्थ में स्नान किया। श्रद्धालुओं ने महार्षि दधीचि मंदिर में दर्शन पूजन किया।
जिसके बाद लोग विभिन्न वाहनों पर सवार श्रद्धालु जयघोष लगाते हुए हर दिशाओं में मिश्रिख से कूच कर रहे थे। श्रद्धालुओं का यह रेला भी देखते बन रहा था। हालांकि साधु, संत व महंत अभी भी मिश्रिख में डेरा डाले हुए है। ये संत व महंत इस धरती पर होलिका दहन करने के बाद वापस अपने मठ, मंदिर व आश्रमों के लिए कूच करेंगे।