बगैर वीजा व पासपोर्ट के 2012 में पकड़ा गया पाकिस्तानी नागरिक दानिश खान शनिवार को जेल से रिहा हो गया। चार साल की सजा पूरी होने पर जेल प्रशासन ने उसे एलआईयू के हवाले कर दिया। उसे पाकिस्तान भेजने के लिए बाघा बॉर्डर रवाना कर दिया गया।
18 मार्च 2012 को एटीएस व कोतवाली टीम ने रोडवेज बस स्टाप के प्रतीक्षालय एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया था। उसकी पहचान कराची के 15/7 बिस्मिल्लाह मसजिद के सामने जुबेरी थाना पापा कॉलोनी में रहने वाले मोहम्मद हनीफ उर्फ दानिश खान पुत्र सलामत खान के रूप में हुई थी। पुलिस ने उसके पास से मोबाइल, एयर व बस टिकट, पासपोर्ट बनवाने के लिए भारतीय फार्म व बाराबंकी से बने राशन कार्ड, इंडियन व बांग्लादेशी करेंसी बरामद की थी।
पुलिस ने कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। 26 सितंबर 2014 को पेशी से वापस जाते समय उसने बज्र वाहन में अपना सिर मारकर खुद को जख्मी कर लिया था। इस मामले में उसके खिलाफ खुद को चोट पहुंचाने का प्रयास व पुलिस कर्मियों को धमकाने का मामला दर्ज हुआ था। 16 फरवरी 2015 को न्यायालय ने उसे पहले मामले में चार वर्ष के कारावास व 11,500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
जुर्माना न भरने पर एक माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई। 28 फरवरी को कोर्ट ने दूसरे मामले में एक वर्ष दो माह की सजा के साथ 500 रुपये के जुर्माना भी लगाया था। शनिवार को इन सभी मामलों में उसकी सजा पूरी हो गई। जेल प्रशासन की सूचना पर पुलिस ने दानिश को बॉर्डर तक छोड़ने के लिए विशेष इंतजाम किए थे।
कागजी कार्रवाई के बाद दोपहर 2:55 मिनट पर उसे जेलर आनंद कुमार शुक्ला ने एलआईयू टीम के हवाले कर दिया। इस दौरान दानिश ने अपना चेहरा कपड़े से ढक रखा था। उसे तत्काल बज्र वाहन से बाघा बॉर्डर रवाना कर दिया गया ।
एलआईयू को सौंपा गया
पाकिस्तानी नागरिक दानिश खान की सजा शनिवार को पूरी हो गई। डीएम व एसपी को जानकारी देने के बाद उनके निर्देश पर दानिश को जेल से रिहा करते हुए एलआईयू को सौंपा गया है। आगे की कार्रवाई एलआईयू की टीम पूरी करेगी।
आनंद कुमार शुक्ला, जेलर
बांग्लादेश से भारत में दाखिल हुआ था दानिश
18 मार्च 2012 को सीतापुर में गिरफ्तार हुआ पाकिस्तानी नागरिक बांग्लादेश के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। दबोचे जाने के बाद पुलिस जांच में इसकी पुष्टि हुई। दानिश हवाई जहाज से पहले बांग्ला देश पहुंचा। बाद में वह अवैध तरीके से बार्डर पार कर भारत आया। वह खुद को एक कपड़ा व्यवसायी बताता था। जो अवैध रूप से भारत का निवासी बनने के लिए यहां दाखिल हुआ था।
दानिश के पास से जो एयर टिकट बरामद हुआ, वह कराची टू ढाका का थ। टिकट 13 दिसंबर 11 को जारी किया गया था। ढाका पहुंचने पर वह टाइम स्टार होटल में ठहरा। यहां उसकी मुलाकात पाक निवासी इमरान से हुई थी। होटल में रुकने के दौरान ही दोनों के बीच दोस्ती हो गई।
इस बीच इमरान ने दानिश का पासपोर्ट अपने पास रख लिया। जब दानिश ने पासपोर्ट मांगा तो इमरान ने उसे गुम हो जाना बताया। इसके बाद इमरान ने कोलकाता निवासी नईम से दाघ्निश की मुलाकात कराई और भारत ले जाकर पासपोर्ट बनवाने को कहा। दानिश नईम के साथ बांग्लादेश से अवैध तरीके से बार्डर पार कर भारत के कोलकाता आ गया।
पुलिस के मुताबिक नईम, दानिश को 14 मार्च 2012 को ट्रेन से लखनऊ लेकर आ गया। यहां उसे लखनऊ के एक मुसाफिरखाना में रखा। इसके बाद लखनऊ के पासपोर्ट कार्यालय ले गया। वहां नईम ने दानिश को फोटो लगा एपीएल कार्ड उपलब्ध कराया। इस कार्ड पर बाराबंकी जिले के पीरबटावन का पता पड़ा था। साथ ही उसे भारतीय पासपोर्ट फार्म उपलब्ध कराया।
जिसके बाद नईम ने दानिश को सीतापुर भेज दिया। यहां उसे बताया गया कि बस अड्डे पर इकबाल भाई मिलेंगे जो आप को पासपोर्ट बनवा देंगे। एटीएस व पुलिस के मुताबिक जब दानिश नईम के साथ लखनऊ पहुंचा था, तभी एटीएस के तत्कालीन इंस्पेक्टर अविनाश चंद्र मिश्रा को मुखबिर से इसकी सूचना मिल गई थी।
सूचना के आधार पर एटीएस के इंस्पेक्टर भानु प्रताप सिंह को गिरफ्तारी के लिए लगाया गया लेकिन तब तक वह सीतापुर जाने के लिए बस से रवाना हो चुका था। वहीं पुलिस टीम ने सीतापुर पुलिस को पूरी जानकारी दे दी। दोनों टीमों ने 18 मार्च को रोडवेज बस स्टैंड से उसे दबोच लिया।
कौन था इकबाल
गिरफ्तारी के बाद सीतापुर के इकबाल भाई का नाम तेजी से उछला। दानिश गिरफ्त में था, इससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि इकबाल भी पकड़ा जाएगा। समय बीता, तो लोग भूलते चले गए। इस दौरान चार वर्ष से अधिक का समय बीत गया, बावजूद इसके पुलिस उस इकबाल को नही तलाश सकी। अब उसकी रिहाई के बाद भी यह राज दफन हो गया।