सीतापुर। जिले की सभी गोशालाओं में जैविक खाद बनाई जाएगी। इससे किसानों को भी जोड़ा जाएगा, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस काम के लिए पशुपालन विभाग की ओर से योजना बनाई जा रही है। इससे गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और रासायनिक खादों पर किसानों की निर्भरता कम होगी। कृषि विभाग की ओर से 75 गोशालाओं में जैविक खाद बनाने की शुरुआत की गई है।
रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से किसानों की रुचि जैविक खाद की तरफ बढ़ रही है। जैविक खाद से जमीन की उर्वरा शक्ति बढदेगी। साथ ही पैदा होने वाला अनाज स्वादिष्ट होगा। पशुपालन विभाग 168 गोशालाओं में जैविक खाद बनाने के लिए योजना बना रहा है। इसके लिए विभाग के सभी चिकित्सकों सहित अन्य कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीएन शुक्ला ने बताया कि कृषि विभाग से समन्वय करके सभी गोशालाओं में जैविक खाद बनाई जाएगी। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत का सहयोग लिया जाएगा।
घन जीवामृत और बीजामृत 48 घंटे में होता है तैयार
कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी हरद्वारी लाल ने बताया कि एक सप्ताह में एक बार में दो सौ लीटर जीवमृत तैयार होता है। जबकि घन जीवामृत और बीजामृत 48 घंटे में तैयार होता है। जीवामृत बनाने के लिए पानी, देशी गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन की आवश्यकता होती। उप कृषि निदेशक डाॅ. एसके सिंह ने बताया कि गोशालाओं के आसपास के किसानों को गोशाला से जोड़ने के लिए जैविक खाद बनाई जा रही है। जिससे वह यहां से जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत बनाने के प्रक्रिया को सीख सकें। साथ ही उसका प्रयोग अपनी खेती में करें, जिससे गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले।