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ओपीडी खुलने से मरीजों को मिली राहत

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सीतापुर। कोरोना की बेकाबू दूसरी लहर काबू में आने के बाद शुक्रवार से जिला अस्पताल की ओपीडी सेवा शुरू हो गई। पहले दिन थोड़ी कम भीड़ रही। ज्यादातर लोगों को ओपीडी खुलने की जानकारी न होने के चलते कम भीड़भाड़ दिखाई दी।
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जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पहले दिन करीब 800 मरीज अपना इलाज कराने पहुंचे। इनकी जांच करके दवाइयां दी गईं। ओपीडी में ज्यादातर चिकित्सक इक्का-दुक्का ही मरीज देखते हुए दिखाई दिए।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 17 अप्रैल से जिला अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद कर दी गई थी। केवल इमरजेंसी सेवाएं चल रही थीं। जिला अस्पताल को कोविड अस्पताल घोषित करने से केवल कोविड के ही मरीज भर्ती किए जा रहे थे।
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करीब डेढ़ माह बाद जब शुक्रवार को ओपीडी सेवा शुरू हुई तो लोगों ने राहत की सांस जरूर ली क्योंकि ओपीडी सेवा बंद होने से शहर के ज्यादातर प्राइवेट चिकित्सकों ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर रखे थे। इसकी वजह से मरीजों को इलाज मिलना बहुत ही मुश्किल हो रहा था।
शुक्रवार को जब ओपीडी खुली तो मरीज अस्पताल में पहुंचे। अपने-अपने चिकित्सकों को दिखाकर इलाज कराया। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि इसकी जानकारी बहुत ही कम मरीजों को हुई। इसी वजह से करीब 800 मरीज ही अस्पताल पहुंचे।
वैसे सामान्य दिनों में ओपीडी करीब दो हजार मरीजों की होती थी। पहले दिन आने वाले मरीजों ने अपनी जांच करवाकर दवाइयां ली। मरीजों ने कहा कि अब इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। इससे राहत मिलेगी।
हंसराजने बताया कि सदर बाजार से चलकर आया हूं। ओपीडी बंद होने से अब तक बहुत दिक्कतें उठाई हैं। कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। यहां पर इलाज मिला तो बहुत राहत हुई है।
विजयपाल ने बताया कि पेट में समस्या बनी हुई थी। ओपीडी बंद थी तो प्राइवेट में चिकित्सक भी नहीं बैठते थे। इससे इलाज के लिए भटकना पड़ रहा था। अब यह समस्या दूर हो गई है।
सुरेश ने बताया कि न्यूरो की समस्या बनी हुई है। पिछले काफी समय से जिला अस्पताल से इलाज करा रहा था लेकिन ओपीडी बंद होने के चलते इलाज बंद था। अब यहां पर इलाज मिलने से राहत महसूस हुई है।
जिला अस्पताल की पैथालॉजी में काफी भीड़ दिखाई दी। चिकित्सकों ने मरीजों को जांच कराने के लिए कहा। इससे मरीज पैथालॉजी पहुंचे तो वहां पर काफी भीड़ दिखाई दी। इस वजह से वे वेटिंग में बैठकर अपनी जांच का इंतजार करते रहे।
काफी देर बाद नंबर आने से मरीज परेशान भी दिखे। कारण यह था कि संक्रमण को देखते हुए पैथालॉजी में एक-एक करके ही मरीज बुलाए जा रहे थे। इससे लोगों को जांच कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा।
जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में दोपहर के समय कई मरीज लाइन में लगे हुए थे। चिकित्सक डॉ. यशवंत व डॉ. सुरेंद्र सिंह नेगी मरीजों को देख रहे थे। चिकित्सकों ने बताया कि सुबह से अब तक 20 से अधिक मरीज आ चुके हैं। सभी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करके दवाइयां दी गई हैं। वहीं मरीज ओपीडी खुलने से राहत महसूस कर रहे थे। पर्चा काउंटर पर भी भीड़ दिखाई दी।
जिला अस्पताल के आयुष भवन में घूरामऊ बंगला से आई नेहा ने बताया कि ओपीडी बंद होने से इलाज मिलना मुश्किल हो रहा था। प्राइवेट में चिकित्सक काफी फीस लेते हैं। उनकी फीस अदा करना मुश्किल हो रहा था। इससे सही से इलाज नहीं करवा पा रही थी। अब जिला अस्पताल से निशुल्क दवाइयां भी ले ली। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी। इससे पहले कई बार अस्पताल आकर दवाइयां ले चुकी हूं।
जिला अस्पताल के हड्डी विभाग में थोड़ी कम भीड़ दिखाई दी। यहां पर इक्का-दुक्का ही मरीज आए। चिकित्सकों ने बताया कि शुक्रवार से ओपीडी शुरू होने की जानकारी बहुत ही कम लोगों को थी। इसी वजह से आज कम लोग आए हैं। कल से भीड़ बढ़ जाएगी।
यहां पर दोपहर तक महज 10 ही मरीज आए थे जबकि दो बजे तक चिकित्सक ओपीडी में बैठे मरीजों का इंतजार कर रहे थे। जब मरीज नहीं आए तो चिकित्सक आपस में बैठे बातें करते हुए दिखाई दिए।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी सेवा शुक्रवार से शुरू हो गई है। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक सेवाएं चलेंगी। पहले दिन कम मरीज आए थे। उनको दवाइयां देकर इलाज किया गया है।
जिला अस्पताल के साथ ही ग्रामीण इलाके के सीएचसी/पीएचसी की ओपीडी सेवा भी शुरू हो गई। तम्बौर सीएचसी में डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि 12 बजे तक केवल नौ पर्चे बने थे। अस्पताल का एक गेट बंद रहा। दूसरे गेट से ही मरीजों को जाने दिया जा रहा था क्योंकि गेट पर ही अस्पताल आने वालों की कोरोना आरटीपीसीआर जांच की जा रही थी।
दूसरे कक्ष में आयुर्वेद डॉ. रंजीत रावत अपनी कुर्सी पर बैठे थे लेकिन उन्हें कोई भी मरीज दिखाने नहीं पहुंचा। बिसवां सीएचसी में शुक्रवार को 166 मरीज पहुंचे। इनका स्वास्थ्य परीक्षण करके दवाइयां दी गईं। चिकित्सक डॉ. कैलाश चंद्रा, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित मेहरोत्रा, डॉ. श्यामसुंदर ने मरीजों को देखा।
महोली सीएचसी में डॉ. मोहित पाल अपने कक्ष में मरीज देखते मिले। वहीं दवा वितरण कक्ष के सामने मरीज दवा ले रहे थे। चिकित्सकों ने बताया कि पहले दिन जुकाम, बुखार व खांसी के सामान्य मरीज ही सीएचसी पर पहुंचे। इसी तरह जिले की अन्य सीएचसी पर भी ओपीडी सेवा चालू हो गईं।
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