नोटबंदी के विरोध में गल्ला व्यापारी हड़ताल पर चले गए हैं। इस कारण किसानों को सरकारी धान क्रय केंद्रों की तरफ रुख करना पड़ रहा है। लेकिन इन केंद्रों पर भी उन्हें राहत मिलती नजर नही आ रही है। वजह, जिला मुख्यालय पर खुले चार क्रय केंद्रों में से एक ही केंद्र पर तौल की जा रही है। अन्य केंद्रों में कहीं केंद्र प्रभारी नहीं है, कहीं कैश की दिक्कत तो कहीं तौल न करने की बात कही जा रही है।
जिला मुख्यालय पर किसानों से धान खरीदने के लिए विपणन शाखा, कर्मचारी कल्याण निगम, पीसीएफ व एफसीआई के क्रय केंद्र खोले गए हैं। इन दिनों 500 व 1000 रुपये की नोटबंदी के विरोध में गल्ला व्यापारी हड़ताल पर चले गए हैं। जिसकी वजह से सरकारी क्रय केंद्र ही किसानों के लिए एक मात्र सहारा है। किसानों की दिक्कत जानने के लिए जब इन क्रय केंद्रों की हालत जानी गई, तब स्थिति बेहद खराब मिली।
कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्र पर मिश्रिख दधीचि आश्रम का किसान मडालू चार ट्रॉली धान लेकर खड़ा था। उसने बताया कि वह बीते शनिवार को इस क्रय केंद्र पर धान लेकर आया था। तब से इस केंद्र पर प्रभारी ही मौजूद नहीं है। शुक्रवार को उसे पूरे सात दिन हो गए, लेकिन ट्रॉली तौली नहीं जा सकी। पीसीएफ व एफसी आई के केंद्र प्रभारी नदारद मिले। पीसीएफ के केंद्र पर कैश न होने की दिक्कत बताई जा रही थी, जिसकी वजह से किसानों का धान न खरीदने की बात कही गई।
एफसीआई सेंटर पर कोई बोलने को तैयार नहीं था, यहां के केंद्र प्रभारी नदारद थे। मंडी का हाल ये था कि महज विपणन शाखा पर ही तौल हो रही थी, जिसकी वजह से उसका स्टाक भी भर गया था। विपणन शाखा के प्रभारी रजितराम यादव ने बताया कि उनके केंद्र पर जो भी किसान पहुंच रहा है, उसका धान मानक देखने के बाद तौलाया जा रहा है। यही वजह है कि यहां पर स्टाक भर गया है। क्रय केंद्र पर 2500 क्विंटल धान लगा हुआ है। स्टाक बढ़ने के कारण अब और धान खरीदने में सोच विचार करना पड़ रहा है।