जिले में मजदूरों की हालत खराब है। असंगठित मजदूरों की दशा तो और भी बदतर है। केंद्र व प्रदेश सरकार मजदूरों के लिए कई योजनाएं चला रही हैं पर जानकारी के अभाव व अन्य कारणों से इसका लाभ मजदूरों को नहीं मिल रहा है।
सीतापुर की आबादी करीब 45 लाख के आसपास है। एक अनुमान के हिसाब से जिले में दो लाख मजदूर हैं। इनमें महज 35 हजार मजदूरों ने श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया है। सरकारी योजनाओं की हकीकत ये है कि हाल में सरकार ने साइकिल योजना लागू की थी।
जिले में महज 1900 मजदूरों को ही इसका लाभ मिल सका। मजदूर की अगर मिल व फैक्ट्री में या फिर किसी अन्य जगह पर मौत हो जाती है, तब उसके परिवार को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।
श्रम विभाग का मानक है कि जिसका रजिस्ट्रेशन है, वे उसी मजदूर को योजना का लाभ दे पाएंगे। यही वजह है कि श्रम विभाग के आंकड़ों में अभी तक ऐसा एक भी मामला दर्ज नहीं है, जिसकी मौत मिल या कारखाने में या फिर किसी अन्य जगह पर हुई हो।
सरकार ने मजदूरों के लिए मातृत्व लाभ योजना चलाई है। मजदूर के घर पुत्री का जन्म होने पर 12 हजार रुपये व पुत्र का जन्म होने पर 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। यदि किसी मजदूर की मौत होती है, तब उसके परिवार को 2 लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है।