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बैंकों की लंबी लाइनें देख हाफ रहे बुजुर्ग 

Fri, 02 Dec 2016 11:21 PM IST
Amarujala Bureau
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कतार में लगे लोग - फोटो : अमर उजाला
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...किसी की उम्र 70 पार है तो कोई 90 साल की उम्र पार कर चुका है। नोटबंदी से आए संकट के बीच ये बुजुर्ग  बैंकों के चक्कर काटने को विवश हैं। आंखों से ढंग से दिखाई नहीं देता। एक कदम भी चलना जंग लड़ने के बराबर है। शरीर साथ नहीं दे रहा। पर मजबूरी में घर से कोसों दूर बैंक जाना भी मजबूरी है।
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नोटबंदी के बाद बैंकों में ऐसे हालात पनपे हैं कि हर जगह भीड़ ही भीड़ नजर आ रही है। ऐसे में पेंशन निकालने आने वाले बुजुर्गों को काफी असुविधा हो रही है। कहने को तो सरकार बुजुर्गों के लिए अलग से लाइन लगाने व सुविधा देने की बात कह रही है, लेकिन उस पर कितना अमल किया जा रहा है, शायद यह देखने वाला कोई नहीं है।

हर बैंक में बुजुर्ग हांफते हुए बैंकों की तरफ बढ़ते व बैंकों में परेशान से भटकते देखे जा रहे हैं। बुजुर्गों का दर्द ऐसा है कि उन्हें भीड़ में ही लाइन लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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शरीर कमजोर, लेकिन बैंक पहुंचीं
बट्सगंज निवासी सावित्री मिश्रा (70) के पैर में हाल ही में चोट लग गई है। जिसकी वजह से उन्हें चलने फिरने के लिए स्पोर्ट चाहिए। पति शिव शंकर मिश्र सेना में थे, जिसकी पेंशन उन्हें मिल रही है। वे शुक्रवार को अपनी बहू ऊषा मिश्रा के साथ स्टेट बैंक आई थीं। कहने लगी कि पेंशन ही एक मात्र सहारा, जब कैश मिले तो कुछ गुजारा हो। यहां पर खाता धारकों की लाइन देखकर वह घबरा रही थीं। 

लाइन में लगे
महोली के रोहिला निवासी दीन दयाल (70) कृषि विभाग के पेंशनर्स हैं। उन्हें लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। दीन दयाल का कहना है कि यहां पर तो सीनियर सिटीजन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से हर बुजुर्ग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भीड़ देख किनारे बैठे
मछरेहटा के बीहट बीरम निवासी डीपी सिंह महिला कल्याण विभाग के पेंशनर्स हैं। वे स्टेट बैंक में रुपये निकालने पहुंचे थे। यहां पर लाइन देखकर वे घबरा गए। जिसके बाद बैंक परिसर में ही एक किनारे बैठकर भीड़ कम होने का इंतजार करने लगे। उन्होंने कहा जब भीड़ कम होगी, तब कैश निकाल लूंगा।
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