सीतापुर। जिले के लोगों के लिए अच्छी खबर है। डीजल लेने के लिए पंप पर जाने की जरूरत नहीं है। अब इसकी होम डिलीवरी शुरू होने जा रही है। जी हां, सुनकर चौंकना लाजिमी है लेकिन खबर सौ फीसदी सच है। कहते हैं कि जरूरत ही आविष्कार की जननी होती है, इसे कोरोना काल में सबने महसूस किया है।
वर्क फ्रॉम होम, कैैशलेस ट्रांजेेक्शन इसी कड़ी का हिस्सा है। खाने-पीने से लेकर दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं को एक कॉल पर मंगाया जा सकता है। अब जल्द ही एक कॉल पर आप तक डीजल भी पहुंचना शुरू हो जाएगा। इसके लिए बस थोड़ा सा इंतजार करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि अभी तक जिले में डीजल की जरूरत होने पर लोग पंप पर जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जरूरत होने पर आपको सिर्फ कॉल करनी होगी। डीजल खुद आपके घर पहुंचाया जाएगा।
जिले में यह सुविधा केंद्र सरकार की ‘फ्यूल एट योर डोर स्टेप’ योजना के तहत यह सुविधा देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस पंप का सीतापुर ट्रेडिंग कंपनी के नाम से लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर खगेसियामऊ के पास फिलिंग सेंटर बनकर तैयार हो चुका है। कुछ काम बाकी है, वह भी तेजी से चल रहा है।
जिस वाहन से डीजल घर-घर पहुंचाया जाएगा, उसका नाम एमबीडी (मोबाइल ब्राउजर डिस्पेंसर) है। सीतापुर ट्रेडिंग कंपनी के संचालक दिनेश अग्रवाल बताते हैं कि एमबीडी वाहन का ऑर्डर दिया जा चुका है। एक सप्ताह के अंदर वाहन आ जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही जिले में डीजल की होम डिलीवरी की सुविधा शुरू हो जाएगी, इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
जानकारों के अनुसार फ्यूल पंप पर जिस तरह से मशीन लगी होती हैं, ठीक उसी तरह से एमबीडी वाहन में भी मशीन लगी है। सबकुछ पारदर्शिता के साथ किया गया है। सारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन रहेंगी। जानकार बताते हैं कि मशीन में डिस्पेंसर भी लगा है जिसकी वजह से डीजल की घटतौली नहीं की जा सकती है।
जानकार बताते हैं कि यह सुविधा सिर्फ घर व संस्थानों में ही दी जाएगी। ऐसा नहीं होगा कि बीच रास्ते में जाते समय आपकी गाड़ी का डीजल खत्म हो गया तो मिल जाएगा। यह सहूलियत फिलहाल रास्ते के लिए नहीं रहेगी।
बताते हैं कि, इस सुविधा को शुरू करने के पीछे केंद्र सरकार की मंशा है कि सड़क हादसों पर अंकुश लगे। दरअसल, मशीन, जनरेटरों के लिए कारखाने, फैक्टरियों में डीजल स्टोर किया जाता है, इसकी वजह से हादसा होने की आशंका रहती है पर यह सुविधा शुरू होने से लोगों को डीजल स्टोर करने की जरूरत नहीं पड़ेेगी। जितनी आवश्यकता होगी, उतना ही डीजल मंगाया जाएगा।
यह सुविधा शुरू होने के बाद खेतीबाड़ी करने वाले लोगों, कारखाना, मोबाइल टावर, हाउसिंग सोसाइटी, अस्पताल, वर्कशाप, दफ्तर, बैंक व कॉलेजों को जरूरत के मुताबिक आपूर्ति कराई जा सकेगी।