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जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए नामांकन आज

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सीतापुर। जिला पंचायत अध्यक्षी के लिए शनिवार को नामांकन होगा। इसी के साथ औपचारिक चुनावी बिगुल बज जाएगा। इससे पहले ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ताई दल भाजपा और विपक्षी दल सपा में खींच-तान चल रही है।
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जिला पंचायत सदस्यों को रिझाने के लिए अंतिम दौर के प्रयास चल रहे हैं। बसपा अभी भी खामोश है। नामांकन सुबह 11 से अपराह्न तीन बजे तक होगा। नामांकन शुरू होने से पहले तक पर्चों की बिक्री जारी रहेगी।
सात वर्ष से जिला पंचायत अध्यक्षी की कुर्सी पर सपा का कब्जा चल रहा है। अबकी भाजपा हरहाल में सपा को कुर्सी से बेदखल करना चाहती है। भाजपा ने सपा से टूटकर पार्टी में शामिल हुए नेता शिवकुमार गुप्त की बहू श्रद्धा सागर को टिकट देकर कुर्सी पर निशाना साधा है। उम्मीदवार को जिताने के लिए पूरी पार्टी एकजुटता के साथ लगी है।
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सांसदों व विधायकों के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्यों को मैनेज करने में लगे हुए हैं। भाजपा के नेता और पदाधिकारी श्रद्धा की जीत सुनिश्चित करार दे रहे हैं। जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा का कहना है कि पंचायत चुनाव में भाजपा नंबर वन पार्टी बनकर उभरी है। जिला पंचायत अध्यक्षी के चुनाव में भी पार्टी प्रदर्शन दोहराएगी। इसमें किसी तरह के शक की गुंजाइश नहीं है।
उधर, सपा ने अनीता राजवंशी पर दांव लगाया है। अनीता को जिताने के लिए पार्टी पूरी ताकत के साथ लगी है। सपा एमएलसी आनंद भदौरिया की अगुवाई में मैदान फतह करने की रणनीति पर काम कर रही है। सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव कहते हैं कि एमएलसी ने कील-कांटा दुरुस्त कर लिया है।
पूरी पार्टी एकजुट होकर सत्ता से लड़ाई लड़ रही है। शनिवार को सुबह 11 से अपराह्न तीन बजे तक नामांकन होगा। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले तक पर्चा खरीदा जा सकता है। अभी तक चार उम्मीदवारों ने नामांकन के सात सेट खरीदे हैं।
जितिन के पार्टी में आने से नेता भाजपा की राह आसान मानकर चल रहे हैं। हालांकि, जितिन से पार्टी को कितना फायदा होगा, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा लेकिन अभी जोश उबाल जरूर मार रहा है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने भाजपा उम्मीदवार श्रद्धा सागर के ससुर शिवकुमार गुप्त और पूर्व बिसवां विधायक रामपाल यादव से पिछले जिला पंचायत चुनाव से छिड़ी रार को खत्म करा दिया है।
जितिन के आगमन पर रामपाल यादव और शिवकुमार गुप्ता कई वर्षों बाद एक साथ देखे गए थे। रामपाल यादव की जिला पंचायत सदस्यों पर मजबूत पकड़ होने की बात भी कही जा रही है। उन्होंने वर्ष 2016 में सत्ता से बगावत करके अपने बेटे जितेंद्र यादव को जितवा लिया था। शिवकुमार और रामपाल के बीच बढ़ रही नजदीकियों से भाजपा गदगद है।
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