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Sitapur News: नहरों में नहीं पानी, बढ़ी परेशानी

Tue, 19 Dec 2023 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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सीतापुर में सूखी पड़ी शारदा सहायक नहर।
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सीतापुर। रबी की फसलों की बोआई के बाद अब पहली सिंचाई की दरकार है। तमाम दावों के बाद भी नहरों में पानी नहीं आ पाया है। मजबूरन किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर रहे हैं। उन्हें 300 रुपये प्रति बीघा तक खर्च करने पड़ रहे हैं। किसानों की जेब पर बोझ के साथ फसल की लागत भी बढ़ रही है।
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जिले में रबी की फसलों की बोआई का लक्ष्य दो लाख 93 हजार 69 हेक्टेयर निर्धारित है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 87.81 प्रतिशत बोआई कर ली गई है। गेहूं की बोआई लक्ष्य के सापेक्ष 83 फीसदी हो चुकी है। जौ की 98 फीसदी जबकि चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, तोरिया व मक्का की बोआई शत-प्रतिशत पूरी हो गई है।
गेहूं व सरसों आदि की फसलों में किसान पहली सिंचाई कर रहे हैं। लेकिन नहरें सूखी होने से किसानों को निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि पंपिंग सेट व समरसेबिल से सिंचाई करने पर उन्हें 300 रुपये प्रति बीघा तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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30 हजार हेक्टेयर की भूमि की सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों पर निर्भरता
जिले में ऐसे कई किसान हैं, जिन्हें फसलों की सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों का सहारा है। कृषि विभाग के अफसरों के मुताबिक जिले में सिंचाई के लिए नहरों पर निर्भरता बेहद कम है। यहां नलकूप से अधिक सिंचाई होती है। फिर भी करीब 30 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए किसान सिर्फ नहरों पर निर्भर हैं।



गेहूं की बोआई का लक्ष्य - 2,10,012 हेक्टेयर
लक्ष्य के सापेक्ष अब तक बोआई - 1,74,309 हेक्टेयर
जिले में छोटी-बड़ी नहरें - 176
नहरों की लंबाई - 1,133 किमी.

खराब हो रहीं
नहरें व माइनरें सूखी होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे फसलें खराब हो रही हैं। किराए पर समरसेबिल से सिंचाई कराने में 300 रुपये तक प्रति बीघा खर्च वहन करना पड़ रहा है।
- राजू सिंह, किसान

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करनी पड़ रही जेब ढीली
किसानों की आय दोगुनी करने के दावे बेमानी हैं। इसके उलट सिंचाई तक के लिए पानी मुहैया नहीं है। पलेवा भी निजी संसाधनों से करना पड़ा था। अब सिंचाई के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
- दीपू मौर्या, किसान


तीन दिनों में छोड़ा जाएगा पानी
शारदा डैम से पानी छोड़ा जा चुका है। जिले की नहरों में दो से तीन दिनों के भीतर पानी पहुंच जाएगा। इसके बाद सभी नहरों व माइनरों में सुचारू रूप से पानी छोड़ा जाएगा। इससे किसानों को सिंचाई संबंधी परेशानी नहीं आएगी।
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- विशाला पोरवाल, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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