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कम नहीं हो रहा बाढ़ का कहर

Sun, 14 Aug 2016 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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घाघरा में कटान तेज - फोटो : अमर उजाला
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यूं तो गांजर क्षेत्र एक माह से भी अधिक समय से बाढ़ का दंश झेल रहा है, लेकिन इधर तीन दिनों से दुर्गा पुरवा व कोनी गांव बड़ी मुसीबत से जूझ रहा है। यहां पर पीड़ितों के सामने बाढ़ से बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझ रहा है।
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बाढ़ का पानी गांव में घुसा है और प्रमुख मार्ग 400 मीटर तक कट गया है। ऐसे में इस गांव से बाहर निकला बेहद मुश्किल हो गया है। पूरे गांजर क्षेत्र में 62 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। रविवार को मामूली रूप से पानी घटा। क्षेत्र के प्रमुख मार्ग से पानी हट गया है, जबकि अन्य संपर्क मार्ग अभी भी पानी में डूबे हुए हैं।

लोगों के घरों में पानी घुसा हुआ है, जहां पर रहना मुश्किल है। पचीसा गांव में रविवार को भी कटान जारी थी। दुर्गा पुरवा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव बाढ़ की चपेट में है, दूसरी तरफ शारदा बह रही है। गांव के एक किनारे पर नाला बह रहा है, जबकि मुख्य मार्ग कटने की वजह से वहां भी गहरा पानी भरा हुआ है।
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गांव के तीन तरफ गहरे पानी का खतरा है। जबकि एक तरफ खेत हैं, जहां गड्ढे व मेड़ से खतरा बना हुआ है। कुल मिलाकर गांव के चारों तरफ खतरा ही खतरा नजर आ रहा है। क्षेत्र के मरेली, जैतहिया, रामलाल पुरवा, जिन्ना पुरवा, लोध पुरवा, गार्गी पुरवा, परमेश्वर पुरवा आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

इन गांवों से बाहर निकलने के लिए नाव ही प्रमुख साधन है, लेकिन यहां पर नाव भी नजर नहीं आ रही है। दूषित पानी पीने की वजह से सैकड़ों लोग बीमार हो रहे हैं। अधिकतर पीड़ित बुखार की चपेट में हैं। बीमार होने के बावजूद ऐसे कोई इंतजाम नहीं है, जिनसे निकलकर बाढ़ पीड़ित अस्पताल पहुंचे और अपना इलाज कराएं। उधर, बैराजों से मुसीबत कम होने के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। रविवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 208466 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।  

बहाव के आगे जवाब दे रही हिम्मत
बाढ़ व कटान पीड़ित संतोष कुमार, रामकुमार, जगन्नाथ, सोहन लाल, नन्हके आदि सैकड़ों लोगों का कहना है कि बीते एक माह से वे बाढ़ व कटान का दंश झेल रहे हैं। अभी तक पानी बर्दाश्त करने लायक था, लेकिन अब उसका स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

वहीं पानी का बहाव भी तेज हो गया है। जिसकी वजह से जान के जोखिम का खतरा बढ़ रहा है। पीड़ितों का कहना था कि राशन खत्म हो गया, पीने योग्य साफ पानी भी नही मिल रहा। यहां तक बर्दाश्त था, लेकिन अब तो जान पर बन आई  है। अब हिम्मत जवाब देने लगी है, बस प्रशासन किसी तरह से बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने का इंतजाम करे, यह काफी होगा।  
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