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बैंकों में पैसा नहीं, भुगतान को भटक रहे लोग

Fri, 23 Dec 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी के 45 दिन बाद भी कैश का संकट खत्म नहीं हो रहा है। हालत यह है कि खाताधारक बैंक तक जाते हैं, वाउचर भरते हैं, लेकिन बैंक के अधिकारी कैश न होने का रोना रोकर लौटा रहे हैं। जिला मुख्यालय को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 260 बैंक शाखाओं में कैश की किल्लत रही। हालत ये थी कि ग्रामीण क्षेत्र की कुछ बैंकों में दोपहर तीन बजे के करीब कैश पहुंचा, जिससे गिने चुने ग्राहकों को ही भुगतान हो सका।
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हरगांव की सलारपुर स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में गुुरुवार सुबह ही लोग बैंक के सामने लाइन लगाकर खड़े हो गए। काफी इंतजार के बाद कैश न मिला तो लोग खाली हाथ लौट गए। उधर, दोपहर बाद तक खाताधारक खाली हाथ लौटते रहे। दोपहर बाद 3 बजे के करीब बैंक में कैश पहुंचा। जिसके बाद भुगतान किया जाने लगा। इधर, लहरपुर, कुतुब नगर, महोली, मछरेहटा, मधवापुर, बिसवां, रेउसा, तंबौर, सिधौली आदि कस्बों में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखाओं में कैश नहीं पहुंच सका था।

मधवापुर में इलाहाबाद बैंक में कैश नहीं पहुंचा था। करीब 260 बैंक शाखाओं का हाल ऐसा रहा कि खाताधारक बैंक पहुंचे जरूर, लेकिन भुगतान नहीं मिला। इनमें कुछ बैंक ऐसी भी रहीं, जिनमें दोपहर बाद कैश पहुंचा, लेकिन तब तक अधिकांश खाताधारक घर जा चुके थे। जिला मुख्यालय पर लगभग सभी बैंकों में कैश था, बावजूद इसके खाताधारकों को अधिकतम 10 हजार रुपये ही कैश निकालने की छूट थी। इस कैश को पाने के लिए भी खाता धारकों को भीड़ का सामना करना पड़ा।
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जिले के एटीएम गुरुवार को भी शोपीस बने नजर आए। जिला मुख्यालय पर महज स्टेट बैंक का एक एटीएम ही चलता नजर आया। जिले में 102 एटीएम लगे हैं, उनमें महज एक एटीएम ही चल सका। वहीं 325 शाखाओं में 260 शाखाएं कैश के संकट से जूझती रहीं।
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