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कोच न होने से दम तोड़ रही प्रतिभाएं

Sun, 28 Aug 2016 11:17 PM IST
Amarujala Bureau
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बदहाल पड़ा मेजर ध्यानचंद स्टेडियम। - फोटो : अमर उजाला
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खेलों को बढ़ावा देकर प्रतिभाएं निखारने के लिए प्रदेश सरकार के सारे जतन दम तोड़ रहे हैं। प्रशिक्षकों के अभाव में खिलाड़ियों की प्रतिभा को जायज मुकाम नहीं मिल पा रहा है। शहर के ध्यानचंद स्टेडियम में संसाधनों की कमी व बदइंतजामी से खिलाड़ी जूझ रहे हैं। ऐसी दशा में ग्रामीण अंचलों में खेल सुविधाओं की बात करना बेमानी है।
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शहर में तरणताल व मेजर ध्यानचंद स्टेडियम है। तरणताल में तैराकी, जबकि ध्यानचंद स्टेडियम में हॉकी, वॉलीबाल, फुटबाल, एथलेटिक्स गेम की सुविधा है। लेकिन ध्यानचंद स्टेडियम बुरी तरह अव्यवस्था का शिकार है। फील्ड की सफाई न होना, संसाधनों व प्रशिक्षकों का टोटा, भवन समेत प्रसाधन जर्जर होना यहां की प्रमुख समस्या है।

मौजूदा समय में यहां सिर्फ हॉकी के लिए प्रशिक्षक तैनात हैं। इसके अलावा अन्य कोई प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ी अपने तरीके से पसीना बहाकर घर चले जाते हैं। इन्हें भी सफाई न होने व रख-रखाव के अभाव में बदहाल हो चुके मैदान में खेलने के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहां आने वाले खिलाड़ी विभागीय अनदेखी से आहत हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि सुविधाओं व संसाधनों के बगैर जिले में खेलों का भविष्य गर्त में पहुंचता जा रहा है। 
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देखभाल न होने से मैदान बदहाल
इकलौते स्टेडियम की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। मैदान में खेलना जोखिम भरा है। क्योंकि सफाई न होने से पत्थर के टुकड़े बिखरे पड़े रहते हैं। 
-फरहत बेग सनी, पूर्व खिलाड़ी 
 
खेल सामग्री का अभाव
स्टेडियम भवन की हालत बेहद खराब है। प्रसाधन इस कदर जर्जर है कि उपयोग में नहीं लिया जा सकता। बारिश के दिनों में फील्ड में पानी भर जाता है। खेल सामग्री का अभाव है। 
-दीपक, हॉकी खिलाड़ी

वॉलीबॉल का प्रशिक्षण देने वाला कोई नहीं
कहने को स्टेडियम है, लेकिन वॉलीबाल का प्रशिक्षण देने वाला यहां कोई नहीं है। प्रशिक्षक न होने से हम लोग थोड़ी देर पसीना बहाकर घर चले जाते हैं। इससे बेहतर खिलाड़ी बनने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा।
-शुभम, वॉलीवाल खिलाड़ी
 
द्रोणाचार्य के बगैर कैसे तैयार होंगे अर्जुन 
देश के लिए खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है। लेकिन अगर सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो इतने बड़े स्तर तक पहुंचने के लिए सोचा भी नहीं जा सकता। संसाधन के अभाव में हम खेल में पिछड़ते जा रहे हैं। द्रोणाचार्य के बगैर अर्जुन कैसे तैयार होंगे!
-राजीव अवस्थी, पूर्व खिलाड़ी
 
कोच व खेल सामग्री की भेजी डिमांड 
संसाधन व प्रशिक्षक सीमित हैं। उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से काम चलाया जा रहा है। मुझे यहां तैनाती पाए अभी एक माह का समय ही हुआ है। हालात में काफी सुधार किया है। खो-खो, वॉलीबाल, एथलेटिक्स आदि के लिए कोच तथा खेल सामग्री की डिमांड विभाग से कर चुका हूं। भवन के लिए स्मार्ट सिटी प्लान में प्रस्ताव शामिल है। 
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-नरेशचंद्र यादव, जिला खेल अधिकारी
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