जिले की बैंकों में कैश का संकट गहराता जा रहा है। मंगलवार को जिला मुख्यालय की बैंक ही कैश संकट से जूझती दिखी। ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में भी कामकाज प्रभावित रहा। पैसा निकालने आए लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
जिले में कुछ एटीएम को छोड़कर अन्य पूरी तरह से खामोश रहे। इस दौरान बैंकों में 30 करोड़ रुपये जमा किए गए। जबकि भुगतान पांच करोड़ के आसपास रहा। बैंक के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते नजर आए कि जिले में कैश का संकट है।
नोटबंदी के हालात सुधरते नजर नहीं आए। शहर के इलाहाबाद व स्टेट बैंक में लोग लाइन लगाकर खड़े थे, यहां बैंक के अधिकारी लोगों से कम रुपयों का विड्राल भरने का निवेदन करते नजर आए। जिला मुख्यालय पर मौजूद लगभग सभी बैंकों में दोपहर बाद कैश खत्म हो गया।
जिला मुख्यालय पर एटीएम का हाल ये था कि केवल स्टेट बैंक परिसर में लगा एटीएम व एचडीएफसी तथा इलाहाबाद बैंक शाखा के एटीएम चलते नजर आए। अन्य एटीएम शांत थे। लहरपुर की सभी बैंकों में कैश संकट रहा। यहां पर भी खाता धारक मायूस नजर आए।
तंबौर स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में कैश मौजूद न होने की बात कही जाती रही। बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली, मिश्रिख, महोली का हाल भी जुदा नही था। यहां भी बैंकों में कैश की किल्लत बताई जाती रही। जिले के सभी एटीएम भी हांफते रहे। मंगलवार को जिले की बैंकों में 30 करोड़ रुपये जमा हुए। जबकि 5 करोड़ के आसपास भुगतान किया गया।
अगली खेप का इंतजार
नोटबंदी के फरमान के बाद सिर्फ एक बार ही आरबीआई से इस जिले में नए रुपये आए हैं। जिसके बाद अब तक नोटों की अगली खेप का सीतापुर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। उम्मीद है कि एक दो दिन में अगली खेप सीतापुर पहुंच जाएगी जिसस संकट कम हो जाएगा।
सिद्धार्थोपॉल, एलडीएम
घट रहा जमा व भुगतान का ग्राफ
नोटबंदी के बाद के आंकड़े अगर देखे जाएं, तो अब बैंकों में रुपये जमा होने व भुगतान करने का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। नोटबंदी के बाद जब पहली बार बैंक खुले, तब जमा का आंकड़ा एक अरब तक पहुंच गया।
जबकि 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अगले दिन जमा का आंकड़ा एक अरब दस करोड़ तक पहुंचा। उस हिसाब से अब बेहद कम रकम बैंक में जमा हो रही है। भुगतान का हाल भी गिरते ग्राफ को दर्शा रहा है।