नोटबंदी से इन दिनों हर तबका हलाकान है। जरूरतमंदों को मौके पर बैंक से कैश नहीं मिल रहा है। जिनके घर का मरीज भर्ती है, उन्हें ज्यादा दिक्कत हो रही है। परिवार के जिम्मेदार इलाज की खातिर रुपयों के इंतजाम के लिए इधर-उधर हाथ फैलाता नजर आ रहा हैं।
हालांकि सरकारी अस्पतालों में तो मरीजों को राहत हैं, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वाले परेशान नजर आ रहे हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज से लेकर दवा तक फ्री हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मां का कैसे हो इलाज
सांडा निवासी विवेक कुमार का कहना है कि उनकी मां दमयंती का इलाज लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जल्द ऑपरेशन करना पड़ेगा। करीब 40 हजार रुपये तक का खर्च आना है। मैं लगातार चार दिनों से इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के चक्कर लगा रहा हूं। मेरे पास एटीएम कार्ड नहीं है और बैंक से भी पैसा नहीं मिल रहा है। जिसकी वजह से मित्रों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। गांव के कुछ मित्रों से करीब 5 हजार रुपये उधार लिए हैं, अब लखनऊ जा रहा हूं।
कहां से करें इंतजाम
बिसवां के मोइजुद्दीनपुर निवासी शरीफुल हसन का कहना है कि उसकी पत्नी शहीन बानो गर्भवती हैं। प्रसव पीड़ा होने पर उसे बिसवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया है। अब समझ में नहीं आ रहा है कि इलाज के खर्च का इंतजाम कहां से करूं। बैंक बंद है। एटीएम कार्ड है नहीं, ऐसे में दूसरों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। खाता इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक परसेहरा में कई दिनों से चक्कर लगाने के बाद भी रुपये नहीं निकले।
बैंक से नहीं निकल रहे रुपये
बिसवां के मोहल्ला पुरवारी टोला निवासी फुरकान अली की पंक्चर की दुकान है। फुरकान का खाता इलाहाबाद बैंक की बिसवां में शाखा है। उसमें रुपये भी जमा हैं। पत्नी गर्भवती थी, तब सोचा था कि जरूरत पड़ने पर बैंक से रुपये निकाल लूंगा। अब पत्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती है। रुपयों का इंतजाम करने के लिए भटक रहा हूं। एटीएम कार्ड है नहीं। फुरकान का कहना है कि एटीएम होता तब भी काम न आता, क्योंकि यहां तो एटीएम भी नहीं चल रहे हैं।