रेउसा का निर्मलपुरवा गांव घाघरा में समा गया। कटान कर रही नदी ने गांव में बचे 30 मकानों को भी अपनी आगोश में ले लिया है। इससे गांव का वजूद खत्म हो गया है। बचे मकानों को ग्रामीण खुद ही तोड़ रहे हैं ताकि मलबा काम में आ सके। वहीं जान बचाने के लिए लोग गांव से कुछ दूर सड़क पर डेरा डाले हैं।
प्रशासनिक मदद न मिलने से सभी में आक्रोश है। हालांकि बुधवार को प्रशासन हरकत में आया। डीएम अमृत त्रिपाठी ने मौके पर जाकर पीड़ितों का हाल जाना। उधर, घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे रेउसा क्षेत्र के 60 व रामपुर मथुरा क्षेत्र के 48 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। हालांकि प्रशासन के आंकड़े इससे इतर हैं।
घाघरा मंगलवार से ही निर्मलपुरवा गांव में कटान कर रही थी। देर रात तक नदी गांव के यज्ञराम, परशुराम, रमेश, बेवा महावीर, मिश्रीलाल, रमाकांत, कृष्णकांत, सतीश, रामपाल, प्रमोद, जयमोद, अनिरुद्ध, सोहन लाल समेत 30 घरों को घाघरा निगल गई।
नदी को करीब आते देख गांव बसाने वाले निर्मलदास, संतोष, राम नरेश, दिनेश, सुशील, सुरेश, अवधेश, मनोज, बैजनाथ ने अपने घरों को तोड़ना शुरू कर दिया। बुधवार को पक्के मकानों पर हथौड़े चल रहे थे, जबकि छप्परों को हटाया जा रहा था। इन ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे।
गांव के लोग किराये के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से घर का मलबा व अन्य जरूरी सामान ढो रहे थे। गांव में महज एक शिव मंदिर, हैंडपंप व एक सरकारी भवन ही बचा है। गांव के अधिकांश हिस््से पर घाघरा की लहरे हिलोरे मार रहीं हैं। लोग बेबस और लाचार होकर अपने आशियानों को घाघरा में समाते हुए देख रहे थे।
बर्बादी देखने के बाद भी कुछ न कर पाने की लाचारी साफ झलक रही थ्ाी। मंगलवार रात से घाघरा के जलस्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। इससे बाढ़ग्रस्त रामलाल पुरवा, सोमवारी पुरवा, परमेश्वरदीन पुरवा, कोनी, दुर्गापुरवा, नया पुरवा, गोड़ियन पुरवा व जैतहिया समेत 60 गांवों में बाढ़ से हालात काफी खराब हो रहे हैं।
ग्रामीणों के सामने भोजन व पानी की दिक्कतें आ रही हैं। उधर, जलस्तर बढ़ने से रामपुर मथुरा क्षेत्र के अंगरौरा, पासिन पुरवा, पंड़ित पुरवा, शुक्लन पुरवा समेत 48 गांवों में बाढ़ आ गई है। पूरे जिले में कुल 108 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांवों में प्रशासनिक मदद के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है।
हालांकि बुधवार को डीएम अमृत त्रिपाठी पूरे लाव-लश्कर के साथ निर्मलपुरवा पहुंचे। यहां उन्होंने बर्बादी का नजारा देखा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को बताया कि यहां पर सरकारी नाव नहीं चल रही हैं। वहीं लोगों को बाहर निकालने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। कटान इसी तरह से होती रही तो दुर्गापुरवा, कोनी समेत कई अन्य गांव कटान की भेंट चढ़ जाएंगे।
इस पर जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और अधीनस्थों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उधर, घाघरा व शारदा बैराजों से बुधवार को 2,46,269 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पानी सीतापुर पहुंचने पर तबाही का मंजर बढ़ सकता है। नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।