एंबुलेंस की लेटलतीफी एक नवजात पर भारी पड़ गई। बुधवार रात प्रसव के बाद परिवारीजन जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस की मदद मांगता रहा लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। करीब दो घंटे बाद परिवार वाले निजी वाहन का इंतजाम कर जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मामला पिसावां स्वास्थ्य केंद्र का है। पीड़ित परिवार ने सिस्टम की लापरवाही के संबंध में शिकायत की है। जिम्मेदार इस मामले में जांच की बात कह रहे हैं।
पिसावां के गूजरपुर निवासी सुशील कुमार की पत्नी नीलम देवी (30) गर्भवती थी। बुधवार शाम प्रसव पीड़ा होने पर परिवार ने उसे पिसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। यहां रात 11:30 बजे महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के कुछ देर बाद ही दोनों की हालत बिगड़ गई।
डॉक्टरों ने उसे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। रेफर होने के बाद परिवार ने 102 नंबर पर एंबुलेंस की सुविधा पाने के लिए कई कॉल की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। नीलम के पति सुशील कुमार का आरोप है कि उस दौरान स्वास्थ्य केंद्र परिसर में दो एंबुलेंस मौजूद थीं, चालक भी थे और एमटी भी थे।
उन्होंने दोनों एंबुलेंस के चालकों व एमटी से संपर्क साधा, लेकिन वह चलने को राजी नहीं हुए। करीब दो घंटे इसी भागदौड़ में गुजर गए। जिसके बाद एक प्राइवेट वाहन से जच्चा-बच्चा को लेकर जिला अस्पताल निकले लेकिन महोली के निकट ही नवजात ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार ने स्वास्थ्य केंद्र में काफी हंगामा किया।
आरोप था कि यदि समय से एंबुलेंस मिल जाती, तो नवजात की जान बच जाती। परिवारीजनों ने इस संबंध में एंबुलेंस सिस्टम के खिलाफ सीएमओ को पत्र भेजा है। यह शिकायती पत्र परिवार ने आशा बहू रामदेवी की तरफ से सीएचसी अधीक्षक को सौंपा है। स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक का कहना है कि एंबुलेंस संचालन पर उनका कोई अधिकार नहीं है। जिसकी वजह से वे कुछ नहीं कर सकते।
की जाएगी कार्रवाई
एंबुलेंस की लेटलतीफी के कारण बच्चे की मौत मामले की शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा। उस पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. हरगोविंद सिंह, सीएमओ