सीतापुर। जिले में आरक्षण के गणित से कई दिग्गजों का तिलिस्म टूट गया है। दशकों से गांव की सरकार पर राज करने वालों को इस बार धीरे से जोर का झटका लगा है। ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी चुनाव में प्रबल दावेदारी ठोकने का ख्वाब संजोने वाले दिग्गजों के अरमान आंसुओं में बह गए हैं। सीटों में हुए उलटफेर से जहां मठाधीशों के खेमे में मायूसी है, वहीं इस आरक्षण के बाद दूसरे वर्ग के खाते में सीटों के जाने से इन ग्राम पंचायतों में नए चेहरों को जनता की नुमाइंदगी करने का मौका मिला है, इससे वह मन ही मन फूले नहीं समा रहे हैं।
पंचायत के आरक्षण ने आजादी से अब तक गांवों की सत्ता पर काबिज तमाम लोगों को इस बार बाहर का रास्ता दिखाया है। यहां दूसरे वर्ग के लोग सत्तासीन होंगे। इससे काबिज लोगों के अरमान धरे रह गए। यह लोग अब आरक्षित वर्ग के अपने चहेतों पर दांव लगाने की सोच रहे हैं। पंचायत के प्रधान पदों के लिए जारी किए गए अनंतिम प्रकाशन में ब्लाक सकरन की ग्राम पंचायत प्यारापुर, लश्करपुर पहली बार एससी के लिए आरक्षित की गई है। इसी प्रकार हरगंाव ब्लाक की ग्रामसभा सेलूमऊ अनुसूचित जाति के आरक्षित की गई।
बेहटा ब्लाक की बेहटा व तंबौर, पिसावां की नेरी, महमूदाबाद की अगैया, बघाइन, जाफरपुर, कंडीचांदपुर, केदारपुर, रमद्वारी प्रथम, शेखपुर, लहरपुर की अकैचनपुर फरीदपुर, गनेशपुर नेवादा, मछरेहटा की फत्तेपुर, कसमंडा की महोली, छरासी, न्योराजपुर, गोंदलामऊ की जैनापुर, औरंगाबाद, बिसवां की लालपुर, रामपुरमथुरा की गोंडा देवरिया के साथ ही एलिया की ग्राम पंचायत रोजहा अनुसूचित जाति महिला सहित कुछ अन्य ग्राम पंचायतें पहली मर्तबा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है।
ब्लॉक रेउसा की ग्राम पंचायत सेउता व रेउसा पहली मर्तबा पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। इसी तरह सकरन ब्लाक की सकरन ओबीसी महिला, हरगांव की मोहरसा ओबीसी, महमूदाबाद की मझिगवां प्रथम पिछड़ी जाति महिला, सुकईपुर, बनवारीपुर पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित की गई है। जिले और भी ग्राम पंचायतें इस वर्ग के लिए पहली बार आरक्षित की गई है।
गांव की सत्ता से हटने की दिखने लगी मायूसी
जिले की तमाम ऐसी ग्राम पंचायतें है, जो आजादी के बाद से आरक्षित नहीं हो सकी थी। इसे लेकर संबंधित वर्ग के व्यक्तियों ने समय-समय पर शिकायतें भी जिम्मेदारों से की, लेकिन सब कुछ ढाक के तीन पात ही रहा। इस बार के आरक्षण में उनकी समस्या का निस्तारण हो गया है। उनकी ग्राम पंचायत आरक्षित हो गई है। इससे संबंधित वर्ग के लोगों में खुशी की लहर है। जबकि इन सीटों पर अब तक काबिज रहे व्यक्तियों को सत्ता से हटने से मायूसी है। कई दिग्गजों की सीटों पर आरक्षित वर्ग की नुमाइंदगी होगी।
पहली बार जहांगीराबाद पंचायत हुई अनारक्षित
जहांगीराबाद। बिसवां विकासखड की जहांगीराबाद ग्राम पंचायत बीते 25 साल में पहली बार अनारक्षित हुई है। ड्ढससे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। यह सीट वर्ष 1995 एवं 2000 में पिछड़ी जाति महिला, 2005 में पिछड़ी जाति, 2010 में महिला एवं 2015 में पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित रही है। इस बार अनारक्षित की गई है। बसुदहा ग्राम पंचायत में लोग आस लगाए थे कि इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होगी, पिछले 25 वर्षों में कभी भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं हुई है। इस वर्ग का एक बार फिर मायूसी हाथ लगी। यह सीट अनारक्षित हो गई है।