सीतापुर। आधुनिकता के इस दौर में पुलिस हाईटेक संसाधनों से लैस है, लेकिन बदलते दौर में अपराधी भी हाईटेक हो गए है। अपराधी सिर्फ हाईटेक ही नहीं बल्कि उन्होंने अपराध करने का तौर-तरीका भी बदल लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अपराध की दुनिया में नए-नए चेहरे दस्तक दे रहे हैं, लेकिन इससे भी हैरानी की बात है कि उनके गुनाह करने का तरीका बिल्कुल पेशेवर अपराधियों जैसा है। यही वजह है कि अपराध जगत की दुनिया में नए चेहरों की दस्तक ने पुलिस की नींद उड़ा दी है।
हाल ही में हुई कई घटनाओं में पुलिस के खुलासे के बाद सामने आया कि पेशेवर अपराधियों के नक्शेकदम पर चलने वाले अधिकतर अपराधी बाहरी हैं या फिर रिकॉर्ड में नहीं हैं। ऐसे में वारदात के बाद खुलासे के लिए पुलिस आसपास के रजिस्टर्ड गैंग पर शिकंजा कस सकती है। शक में दायरे में आने वाले पूर्व के अपराधियों से पूछताछ करती है, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाती है। पुलिस सूत्रों की माने तो इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वारदात नए अपराधी देते हैं। ऐसे में पुलिस की जांच की दिशा उधर जाती ही नहीं है। शक भी नहीं होता, लेकिन गहराई से की गई पड़ताल व मजबूत नेटवर्क के बूते जब पुलिस नए गैंग को भेदने का काम करती है, तब वह भी हैरान रह जाती है।
घटनाओं के खुलासे में लगती है देरी
पुलिस सूत्रों की माने तो अपराध जगत की दुनिया में नए चेहरों के आने के बाद उन्हें पकड़ना आसान नहीं होता है। वजह, घटना के बाद पुलिस पेशेवर अपराधियों की कुंडली खंगालने में लग जाती है। इसी का फायदा उठाकर असली गुनहगार बचते रहते हैं। नए चेहरों को आसानी से पकड़ पाना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं है।
शातिर अपराधी मोबाइल का नहीं करते इस्तेमाल
पुलिस के जानकारों की माने तो गैंग बनाकर वारदात करने वाले नए अपराधी अधिकतर घटनाओं में मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। उन्हें पता है मोबाइल का इस्तेमाल करने से वह पकड़े जाएंगे। इसलिए यह होशियारी दिखाते हैं, लेकिन कहते है कि कानून के हाथ काफी लंबे होते हैं और अपराधी वारदात के बाद कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। इसी के जरिए पुलिस उस तक पहुंच जाती है।
शहर कोतवाली इलाके में कई माह पूर्व कलेक्ट्रेट कालोनी में सेवानिवृत्त कर्मचारी के घर में दिनदहाड़े बदमाशों ने घुसकर उसकी पत्नी पर हमलाकर लूटपाट की थी। खुलासे में जुटी पुलिस को कामयाबी मिल गई थी। खुलासे के बाद सामने आया था कि बदमाशों ने पहली बार घटना को अंजाम दिया है। इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन जिस तरह से घटना की थी, उससे पुलिस भी यही मान रही थी कि यह पेशेवर अपराधियों का ही काम है। सबसे दिलचस्प बात तो यह कि इन बदमाशों को एक बार संदेह के आधार पर लाकर पुलिस पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन इतनी सफाई गुमराह किया कि पुलिस भी भरोसा कर बैठी थी।
महमूदाबाद इलाके में पिछले महीने लूटपाट की घटनाएं हुईं थी। इन वारदातों को नए गैंग के सदस्य अंजाम दे रहे थे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने घटनाओं का खुलासा कर पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया था। पकड़ा गया एक बदमाश कुश्ती चैंपियन भी रह चुका था। यह बदमाश पुलिस के रिकार्ड से बाहर थे।
नए बदमाश गैंग बनाकर अपराध कर रहे हैं। कई घटनाओं के बाद हुए खुलासे से यह सामने आया है। गैंग को रजिस्टर्ड कर गिरोह के सदस्यों पर पुलिस नजर रख रही है। एक साल में चिह्नित किए नए गैंगों के लीडर जिले के ही हैं, जबकि सदस्य बाहरी हैं। यह जिले के आपराधिक रिकॉर्ड में नहीं थे।
एनपी सिंह, एएसपी साउथ