धर्म नगरी नैमिषारण्य में ठहरा रामादल बुधवार की भोर अपने दसवें पड़ाव कोल्हुआ बरेठी के लिए कूच कर गया। 84 कोसी परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बन रहा था। डमरू, शंख, घंटा व घड़ियाल की ध्वनि पर संत, महंत व श्रद्धालु नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
श्रद्धालु इस बात को लेकर प्रसन्न थे कि अब मंजिल उनसे महज दो पड़ाव ही दूर बची है। परिक्रमार्थियों की प्रसन्नता पर उस वक्त ग्रहण लगा, जब उन्हें कोल्हुआ बरेठी पड़ाव बदहाल मिला। नतीजा यह रहा कि बहुत से परिक्रमार्थी सदियों पुरानी परंपरा को तोडक़र मिश्रिख पड़ाव की तरफ कूच करते नजर आए।
हालांकि कुछ श्रद्धालुओं ने कोल्हुआ बरेठी पड़ाव पर डेरा डाले रखा। रामादल मंगलवार को जरत्कारु ऋषि की तपस्थली से कूच करके धर्म नगरी नैमिषारण्य पहुंचा था। यहां पर रात्रि विश्राम करने के बाद भोर होते ही श्रद्धालुओं ने आदि गंगा गोमती, चक्रतीर्थ आदि तीर्थों में स्नान किया और मां ललिता देवी, हनुमानगढ़ी आदि मठ, मंदिरों में पूजा-अर्चना कर दसवें पड़ाव कोल्हुआ बरेठी के लिए कूच किया।
रामादल रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों में माथा टेकते हुए आगे बढ़ता रहा। साधु, संत व महंत श्रद्धालुओं को रास्ते में पड़ने वाले तीर्थों का महत्व बता रहे थे। परिक्रमा में विभिन्न प्रदेशों व नेपाल के श्रद्धालु शामिल हैं। क्षेत्र के ग्रामीण परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए पहले ही मार्ग के किनारे आकर खड़े हो गए थे।
बहुत से ऐसे श्रद्धालु भी थे, जिन्होंने परिक्रमार्थियों के स्वागत में स्टाल लगा रखे थे। ये श्रद्धालु परिक्रमार्थियों को चाय, नाश्ता, पूड़ी, सब्जी आदि का प्रसाद वितरित कर रहे थे। श्रद्धालुओं की संख्या लाखों मेें थी, बावजूद इसके स्वागत करने वालों के हौसलों में कमी नजर नहीं आ रही थी।
बुधवार की भोर नैमिषारण्य से शुरू हुआ श्रद्धालुओं का रेला दोपहर के समय कोल्हुआ बरेठी पड़ाव पर पहुंचा। यहां पर श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, चित्रकूट आदि मंदिरों में दर्शन, पूजन किया। पड़ाव के लिए पर्याप्त स्थान न मिलने के कारण काफी संख्या में श्रद्धालु कोल्हुआ बरेठी पड़ाव पर ठहरे ही नहीं।
श्रद्धालु व साधु, संत कोल्हुआ बरेठी में डेरा डालने के बजाए सीधे 11वें पड़ाव मिश्रिख के लिए कूच कर गए। शाम तक काफी संख्या में श्रद्धालु मिश्रिख पड़ाव पर पहुंच भी गए। हालांकि कुछ श्रद्धालुओं ने कोल्हुआ बरेठी में डेरा डाला।
परिक्रमा में चल रहे श्रद्धालुओं ने कोल्हुआ बरेठी में डेरा न डालने का ठीकरा प्रशासन के सिर पर फोड़ा है। श्रद्धालुओं का कहना था कि पड़ाव की अधिकांश भूंमि को क्षेत्र के भट्ठे वाले ने हजम कर लिया है।
लक्ष्मण टीला खनन की भेंट चढ़ गया है, चित्रकूट तीर्थ सूख गया, मंदिर बदहाल पड़ा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर कोल्हुआ बरेठी में व्यवस्था ठीेक होती तो श्रद्धालु अन्य पड़ावों की तरह इस पड़ाव पर भी डेरा डालते।