औरंगाबाद (सीतापुर)। 84 कोसी परिक्रमा में गंगा–जमुनी तहजीब भी देखने को मिलती है। मुस्लिम समुदाय की ओर से परिक्रमार्थियों के स्वागत सत्कार का अनूठा आयोजन किया जाता है।
सतयुग का इतिहास संजोए 84 कोसी परिक्रमा पथ में औरंगाबाद भी शामिल है। खास बात यह है कि औरंगाबाद से होकर परिक्रमा दो बार गुजरती है। नैमिषारण्य से परिक्रमा के पहले पड़ाव कोरौना जाने पर परिक्रमार्थी औरंगाबाद से होकर निकलते हैं। आठवें पड़ाव जारिगवां से नौवें पड़ाव नैमिषारण्य के रास्ते में भी यह कस्बा पड़ता है।
कस्बावासी इसे अपना सौभाग्य मानते है कि उन्हें श्रद्धालुओं के स्वागत सत्कार करने का दो बार अवसर मिलता है। इस अवसर का कस्बे के हिंदू व मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। औरंगाबाद के प्रधान नफीस अहमद व प्रधान प्रतिनिधि आकिफ रब्बानी ने बताया कि इस बार भी परिक्रमार्थियों के भव्य स्वागत सत्कार की तैयारियां की जा रही हैं।
तैयारियों के क्रम में परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले पंचायत भवन, अमृत वाटिका व शौचालय का रंग–रोगन कराया जा रहा है। रंग–बिरंगी झालरों से सजाया भी जाएगा। पंचायत भवन में श्रद्धालुओं के लिए पंडाल लगाकर भंडारा व विश्राम करने की व्यवस्था की जा रही है।
इसी क्रम में पेयजल, प्रकाश और साफ-सफाई की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कस्बे में पड़ने वाले परिक्रमा पथ के प्रत्येक तिराहे व चौराहे पर मार्ग संकेतक व सीसीटीवी कैमरे ग्राम पंचायत की ओर से लगाए जा चुके हैं। परिक्रमार्थियों का फूल–मालाओं से भव्य स्वागत किए जाने की तैयारी की गई है।