सीतापुर। कोलकाता में प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ हुई दरिंदगी के विरोध में प्राइवेट चिकित्सकों ने शनिवार को अपने क्लीनिक बंद रखकर विरोध जताया। 100 से अधिक निजी अस्पताल बंद होने से दिनभर मरीज भटकते रहे। चिकित्सकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। आईएमए के बैनर तले पैदल मार्च निकालकर डीएम व एसपी को ज्ञापन सौंपा। हालांकि जिला अस्पताल की सेवाएं बहाल होने से मरीजों को कुछ हद तक राहत मिली।
प्रशिक्षु चिकित्सक की हत्या के बाद शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे प्रशिक्षु चिकित्सकों पर हमले के विरोध में हर तरफ आक्रोश फैला हुआ है। आईएमए ने एक दिन पहले ही हड़ताल करने की घोषणा कर दी थी। सिविल लाइन स्थित आईएमए भवन से चिकित्सकों ने करीब 11.30 बजे पैदल मार्च निकाला। आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर सदर तहसील पहुंचे।
संपूर्ण समाधान दिवस में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम अभिषेक आनंद व एसपी चक्रेश मिश्र को सौंपा। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. पीके धवन, सचिव डॉ. एसके वैश्य, डॉ. विनोद त्रिपाठी, डॉ. केडी जोशी, डॉ. सुनील वैश्य सहित तमाम चिकित्सक मौजूद रहे। हड़ताल को केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश मेडिकल एंड सेल्स प्रतिनिधि एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, फिजियोथिरेपी एसोसिएशन, रोटरी क्लब व व्यापार संगठन ने समर्थन दिया था। चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से शनिवार को प्राइवेट चिकित्सकों की क्लीनिक पूरी तरीके से बंद रहीं। क्लीनिक पर मरीज आए और वहां पर लगी तख्ती देखकर लौट गए। निजी अस्पतालों के शिक्षक रविवार सुबह छह बजे तक काम ठप रखेंगे।
ये रहीं प्रमुख मांगें
दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। चिकित्सकों के लिए एक केंद्रीय कानून बनाया जाए। स्वास्थ्य संस्थाओं को विशेष संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए। राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद को मजबूत किया जाए।
जिला अस्पताल बना सहारा
निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर होने से जिला अस्पताल मरीजों के लिए दिनभर राहत देता रहा। शनिवार की वजह से ओपीडी में करीब 3500 मरीजों ने इलाज करवाया। यहां पर फिजीशियन कक्ष, हड्डी कक्ष, ईएनटी में मरीजों की लाइनें नजर आईं। आमतौर पर शनिवार को दोपहर 12 बजे तक ओपीडी रहती है। यहां पर कम ही भीड़ लगती थी। लेकिन निजी चिकित्सकों की हड़ताल के चलते हर तरफ भीड़ नजर आई।
हड़ताल की नहीं थी जानकारी
महेश ने बताया कि डॉ. सुनील वैश्य को अपने बच्चे को दिखाने आए थे। लेकिन क्लीनिक बंद होने से जिला अस्पताल में दवा लेने जाना पड़ा। मोहित ने बताया कि डॉ. पीके धवन से दिल की बीमारी का इलाज चल रहा है। अस्पताल बंद था तो मेडिकल स्टोर से कामचलाऊ दवा ले ली है। अब रक्षाबंधन के बाद ही दिखाने आएंगे।