फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न बंटा दूध, न बन सकी तहरी

Wed, 09 Dec 2015 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
विज्ञापन
विज्ञापन
केस-1 नहीं बना एमडीएम
विज्ञापन

पिसावां विकास खंड का प्राथमिक विद्यालय नेवादा। यहां पर पंजीकृत 115 के सापेक्ष केवल 20 ही नौनिहाल आए थे। स्कूल में दूध बंटना तो दूर खाना तक नहीं बना। शिक्षामित्र अंजली से जब कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ईंधन न होने की वजह से खाना नहीं बना है।

इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय मूडा खुर्द में 12.30 बजे तक न तो छात्र मिला न ही शिक्षक। ग्रामीण प्रमोद गुप्ता व सतीश ने बताया कि 28 नवंबर को चुनाव हुआ है। तब से शिक्षक नहीं आ रहे हैं। बच्चे आते हैं,मगर वह वापस लौट जाते है।
विज्ञापन


केस-2 दूध के नहीं हुए दर्शन
प्राथमिक विद्यालय रुकंदीपुर में केवल बीस नौनिहाल मिले। यहां पर भी एमडीएम नहीं बना। प्रशिक्षु शिक्षक ने बताया कि प्रधान द्वारा एमडीएम बनवाया जाता है। उन्होंने खाद्यान्न नहीं दिया, इसी वजह से एमडीएम नहीं बन सका।

इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय पथरी में केवल पंद्रह नौनिहाल मिले। यहां पर दूध नहीं बंटा। बल्कि मेन्यू के विपरीत कड़ी चावल बना।

केस-3 मेन्यू के विपरीत बना भोजन
प्राथमिक विद्यालय सैदापुर में एक बजे तक न तो बच्चे मिले न ही शिक्षक। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री ने बताया कि एमडीएम में कोफ्ता-चावल बना था। शिक्षक न आने की वजह से बच्चे खाना खाकर वापस चले गए।

प्राथमिक विद्यालय हजियापुर में सब्जी-चावल बना था। प्रधानाध्यापक से जब दूध व कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ने के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। जबकि मेन्यू के विपरीत भोजन पर बताया कि प्रधान द्वारा बनवाया जाता है।

ये कुछ केस तो महज बानगी है। अधिकांश परिषदीय स्कूलों में बुधवार को दूध व नए मेन्यू के अनुसार भोजन बना ही नहीं। कहीं छात्र संख्या बहुत कम मिली, तो कहीं शिक्षकों को इसकी जानकारी ही नहीं थी।

शिक्षकों ने भोजन बनवाने में एक-दूसरे पर आरोप लगाया। कहीं प्रधान को जिम्मेदार ठहराया तो कहीं ईंधन की किल्लत बताई। ऐसे में नए सिरे से बुधवार को दूध वितरण की व्यवस्था फेल रही। जिससे नौनिहाल दूध का स्वाद चखने से वंचित रह गए।

मध्याह्न भोजन योजना के तहत नौनिहालों को बुधवार को दूध व तहरी का मेन्यू तय किया गया है। यह मेन्यू आज से लागू होना था। दूध को लेकर कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ाई जा चुकी है। इसको लेकर बीईओ को निर्देश जारी किए गए थे।
विज्ञापन


लेकिन शिक्षकों पर इसका असर कहीं नहीं दिखाई दिया। अधिकांश स्कूलों में पुराने ढर्रे पर भोजन बना। न तो मेन्यू का पालन हुआ न ही दूध का वितरण हो सका। जिम्मेदारों ने भी इसका निरीक्षण करने से गुरेज किया, जिससे दूध व तहरी देने की योजना पहले दिन ही फेल हो गई। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें