नैमिषारण्य। वट सावित्री व्रत पर इस बार शनि जयंती के साथ ही सौभाग्य और शोभन योग बन रहा है। ग्रहों की स्थिति के कारण बुधादित्य, नवपंचम, गजलक्ष्मी, विपरीत राजयोग का निर्माण भी हो रहा है। ऐसे में विशेष महत्व के साथ इस बार वट सावित्री व्रत शुभ फलदायी माना जा रहा है।
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। वट सावित्री व्रत इस बार 16 मई को रखा जाएगा। आचार्य दीपक अवस्थी ने बताया कि इस बार वट सावित्री पूजन का विशेष महत्व है। वट सावित्री व्रत के दिन शनि जयंती का संयोग बन रहा है। सौभाग्य और शोभन योग के साथ ही बुधादित्य, नवपंचम, गजलक्ष्मी, विपरीत राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। इसके साथ ही विधिवत वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। पूजा-पाठ करने के बाद ही सुहागिनें व्रत का पारण करती हैं।
प्राचार्य प्रभाकर द्विवेदी ने बताया कि वट सावित्री व्रत पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक है।
सुबह से देर रात तक रहेगी अमावस्या
आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि अमावस्या तिथि का प्रारंभ 16 मई को सुबह 05:11 बजे से होगा। देर रात्रि 01:30 बजे तक अमावस्या रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत का पर्व मनाया जाएगा।
इसलिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं सुहागिन
सनातन धर्म में बरगद के वृक्ष को पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। यही वजह है कि वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का विशेष महत्व है।