सिधौली में मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस में डीएम सूर्यपाल गंगवार ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं। डीएम सुबह 9:15 बजे ही सिधौली पहुंच गए। तहसील में उन्हें सन्नाटा मिला। इस पर वह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का औचक निरीक्षक करने जा पहुंचे।
जहां आवश्यक निर्देश देने के बाद वे तहसील सभागार आए। यहां लेट-लतीफ आने वाले अफसरों को चेतावनी दी और कार्यशैली में सुधार लाने की ताकीद की। इस दौरान डीएम ने दो माह के अंदर पट्टे की जमीनों को कब्जामुक्त करने के निर्देश अफसरों को दिए। कसमंडा ब्लॉक की कई शिकायतें आने पर बीडीओ को फटकार लगाई।
जिले की सात तहसीलों के तहसील दिवसों में 708 शिकायतें दर्ज की गई। इनमें से 53 का तत्काल निस्तारण कराया गया। सिधौली में 238 शिकायतें आई। इनमें से 23 का तत्काल निस्तारण करा दिया गया। इसके अलावा सीतापुर में 128 में से एक, मिश्रिख में 57 में से एक, महोली में 98 में से 4, बिसवां में 67 में से 2, महमूदाबाद में 54 में से 8, लहरपुर में 66 में से 14 शिकायतें निस्तारित की गई।
चौथी बार भी मायूस होकर लौटा सियाराम
दबंगों के कब्जे से अपनी जमीन मुक्त कराने के लिए सदर तहसील के प्रतापपुर गांव से सियाराम चौथी बार तहसील दिवस में शिकायत लेकर आया था। मगर अभी तक उसकी फरियाद अफसरों ने नहीं सुनी है। जिससे वह बेहद मायूस होकर लौट गया।
सुविधा शुल्क से भी नहीं बनी बात
खेत नपाई के लिए उल्फतसरांय गंगापुर निवासी रमेश कई महीनों से सदर तहसील का चक्कर काट रहा है। एसडीएम के निर्देश के बाद भी लेखपाल को पांच सौ रुपये देने पड़े, लेकिन अभी तक उसके खेत की नपाई नहीं हो सकी है।
गुहार पर भी नहीं हो रही सुनवाई
घर के सामने जबरन नाली बनाकर गंदा पानी छोड़े जाने की शिकायत लेकर पीतपुर की माया देवी तीसरी बार तहसील दिवस में आई थीं। गांव में दबंग उन्हें धमका रहे हैं। माया देवी के बार-बार गुहार करने पर भी अफसरों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है।
कोई नहीं सुन रहा अनीसा का दर्द
ससुराल पक्ष द्वारा मारपीट कर भगा दिए जाने के बाद से अटरिया की अनीसा कई महीनों से डीएम व एसपी दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं। मंगलवार को वह फिर शिकायत लेकर एसपी के पास आई थीं। जहां से उन्हें तहसील दिवस भेज दिया गया। तहसील दिवस में उनका प्रार्थना पत्र लिया ही नहीं गया।