सीतापुर। पंचायत चुनाव को मिशन 2022 का सेमीफाइनल मानकर चल रही भाजपा के ‘माननीयों’ का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। कई ऐसे विधायक हैं, जिनके विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का एक भी जिला पंचायत सदस्य नहीं चुना गया है। किसी विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय तो कहीं विपक्षी दलों के उम्मीदवारों ने भाजपा का सूपड़ा साफ कर दिया है। इससे पार्टी दोहरे संकट में पड़ गई है। पार्टी के सामने एक तो अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की चुनौती है, दूसरे डैमेज कंट्रोल की चिंता भी उसे सता रही है।
भाजपा ने पंचायत चुनाव पूरे जोश के साथ लड़ा था। शुरुआत से पार्टी ने आक्रामक नीति अपनाई थी। प्रदेश नेतृत्व ने पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सांसद हरिद्वार दुबे को जिले की कमान सौंप दी थी। उनकी देखरेख में पार्टी का समूचा सिस्टम उम्मीदवारों के चयन के साथ ही माहौल बनाने में लग गया था। उम्मीदवारों के चयन में ही पार्टी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था। सूची जारी होते ही बगावत के स्वर बुलंद होने लगे थे। बगावत इस कदर हावी हो गई थी कि पार्टी को 14 पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ गया था।
इसके बाद भी पार्टी के जोश के कोई कमी नहीं आई थी। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने जनसभाएं और नुक्कड़ सभाएं करके घोषित उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। बावजूद भाजपा को अच्छे परिणाम नहीं मिले। कई विधायकों ने तो पार्टी की लुटिया ही डुबो दी।
अगर दो विधानसभा क्षेत्रों के ज्वाइंट जिला पंचायत क्षेत्रों को छोड़ दें तो मिश्रिख, महोली, हरगांव और लहरपुर के विधायक एक भी सीट नहीं जिता पाएं हैं। लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में लगभग पूरे जिले को केसरिया रंग में रंगने में सफल रही भाजपा पंचायत चुनाव में फीकी पड़ गई है। पिसावां, मिश्रिख, गोंदलामऊ, मछरेहटा, सिधौली, सकरन, हरगांव, परसेंडी, एलिया, महोली, महमूदाबाद व रामपुर मथुरा ब्लॉक में भाजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया है। पार्टी बेहटा, कसमंडा, पहला, बिसवां और रेउसा से 14 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है।
अब निर्दलीय को अपने पाले में करने की कोशिश
पंचायत चुनाव में खराब प्रदर्शन से पार्टी नेतृत्व के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। इन दिनों पार्टी दोहरे संकट से गुजर रही है। जिला पंचायत अध्यक्षी के चुनाव में हार का डर सामने खड़ा है। इसे टालने के लिए पार्टी के पास निर्दलीय का सहारा लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। पार्टी सूत्रों की माने भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा ने निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों को पाले में लाने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं। उधर, वह जिला कार्यालय पर रोजाना विधायकों के साथ बैठक करके भी इस संकट से उबरने की रणनीत पर मंथन कर रहे हैं।
सपा ने तेज की साइकिल की रफ्तार
पंचायत चुनाव में भाजपा की बिगड़ी हालत देख सपा के हौसले सातवें आसमान पर हैं। पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्षी के चुनाव की गोटियां बिठानी शुरू कर दी हैं। सपा के कई वरिष्ठ नेता निर्दलीय जीतकर आए जिला पंचायत सदस्यों के संपर्क में हैं। उधर, पार्टी के पास मजबूत दावेदारी भी है। पूर्व कारागार मंत्री रामपाल राजवंशी की बहू संगीता चुनाव जीत गई हैं।
सपा में रामपाल राजवंशी की पकड़ भी मजबूत है। ऐसे में पार्टी को बस निर्दलीय उम्मीदवारों के आने का इंतजार है। पार्टी के सूत्रों की माने तो नरेंद्र वर्मा गुट ने भी जिला अध्यक्षी कुर्सी पार्टी की झोली में डालने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सपा इस मुहिम में कितना कामयाब होगी, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।