सीतापुर। साल की दूसरी लोक अदालत अर्से से अलग-अलग रह रहे तीन विवाहित जोड़ों के लिए खुशियों का पैगाम लेकर आई। लोक अदालत में काफी समय से लंबित तीन अलग-अलग वैवाहिक मामलों में विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थों की ओर सेविवाहित युवक-युवतियों की आपस में वार्ता कराकर उनके मध्य चल रहे मनमुटाव को दूर कराया गया। जिसके बाद रोज न्यायालय का चक्कर लगाने के बजाय ये विवाहित जोड़े रविवार को एक साथ रहने का संकल्प लेकर न्यायालय से रवाना हुए।
अपर सत्र न्यायाधीश, प्राधिकरण के सचिव अभिषेक उपाध्याय के मुताबिक सीतापुर के संदना की खुशबू अपने फर्रुखाबाद निवासी पति रोहित के साथ, सीतापुर के मिश्रिख की रहने वाली निशा कमलापुर निवासी अपने पति जितेंद्र के साथ तथा तालगांव के रहने वाले नेहा और सुशील इस लोक अदालत में अपने-अपने मध्य चल रहे मुकदमों का आपसी सांमजस्य से निस्तारण कराकर एक साथ रहने का राजी हो गए हैं।
153 वैवाहिक मामले निस्तारित
जिले के तीन परिवार न्यायालयों में रविवार को हुई लोक अदालत में 153 वैवाहिक मामले निस्तारित किए गए। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने अपने न्यायालय में विचाराधीन 76 लंबित वादों तथा दो प्री-लिटिगेशन वैवाहिक वादों का निस्तारण किया। परिवार न्यायालय कोर्ट संख्या एक राम मणि पाठक ने 60 लंबित व दो बातचीत कर निपटाए गए दो वैवाहिक वादों तथा परिवार न्यायालय कोर्ट संख्या दो सुबोध भारती ने 10 लंबित व तीन प्री-लिटिगेशन वाद सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराए।
बैंक रिकवरी की दृष्टि से फायदेमंद रही लोक अदालत
सीतापुर की दीवानी कचहरी न्यायालय व राजस्व न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों द्वारा भी कुछ पुराने वादों के निस्तारण का दावा करते हुए रविवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमे निपटाए गए। अगर अपर जिला जजों की बात करें अपर जिला जज राकेश वर्मा के 52 मुकदमों को मिलाकर सभी अपर जिला जजों ने 62 वादों का निस्तारण किया। इसके अलावा सीतापुर, लहरपुर, महमूदाबाद, बिसवां के मजिस्ट्रेट न्यायालयों द्वारा भी 6 हजार 333 वाद निस्तारित किए गए। उपभोक्ता फोरम सीतापुर के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव ने पांच वादों का निस्तारण कर समझौता राशि के रूप में 19 हजार 197 रुपये जहां एवार्ड किए, वहीं विभिन्न बैंकों के रिकवरी के 10 हजार 192 मामलों में 11 करोड़ 34 लाख 92 हजार 577 रुपये की समझौता राशि वसूली गई। मालूम हो सत्र की पहली लोक अदालत की अपेक्षा इस बार बैंक रिकवरी की राशि लगभग तीन गुना रही।