सीतापुर। जिला अस्पताल में चार दिन से लिवर संबंधी जांचें ठप हैं जिसकी वजह से रोजाना 150 से 200 मरीज लौट रहे हैं। मजबूरन वे बाहर से जांच करवाते हैं और पांच से आठ सौ रुपये अतिरिक्त देना पड़ता है।
जिला अस्पताल की पैथालॉजी में बायो केमिस्ट्री मशीन लगी हुई है। इस मशीन के जरिए लिवर संबंधी एलएफटी, किडनी व यूरिक एसिड की जांच होती है। 26 सितंबर को यह मशीन खराब हो गई थी। उसके बाद से इस जांच के सैंपल लेना बंद कर दिए गए थे। पहले दिन मरीजों को वापस कर दिया गया था। बुधवार को जांच के लिए फिर से बुलाया था। धीरे-धीरे चार दिन बीत गये है। लेकिन अभी तक मशीन चालू नहीं हो पाई है। इसके अभाव में मरीजों को लौटाया जा रहा है।
लिवर की जांच कराने आए रमेश ने बताया कि बाहर पैथालॉजी के रेट के अनुसार एलएफटी व किडनी में संक्रमण की जांच करीब आठ सौ रुपये में हो पाएगी। मजबूरी में बाहर से जांच करवानी पड़ी। इसके अलावा हर्ष ने बताया कि जोड़ों में बहुत दर्द हो रहा था। हड्डी रोग विशेषज्ञ ने बताया कि आपका यूरिक एसिड बढ़ गया है। लैब में जांच बंद थी तो बाहर से करवानी पड़ी। इसी तरह तमाम मरीज वापस लौट गए। शुक्रवार को ओपीडी में करीब 3200 मरीज आए। इसके चलते पर्चा काउंटर से लेकर दवा काउंटर तक भीड़ ही भीड़ दिखाई दी।
गार्ड गायब तो अंदर घुसे मरीज, मची अफरातफरी
जिला अस्पताल की पैथालॉजी में इस समय काफी भीड़ उमड़ रही है। बायो केमेस्ट्री मशीन को छोड़कर अन्य जांचें हो रही हैं। इसके लिए पैथालॉजी के बाहर गार्ड की तैनाती की गई है। गार्ड लाइन से मरीजों को अंदर भेजते हैं। शुक्रवार को गार्ड गायब था तो मरीज पैथालॉजी के अंदर पहुंच गये।
इससे स्वास्थ्य कर्मी को कंप्यूटर से रिपोर्ट निकालने में व्यवधान उत्पन्न कर दिया। कई बार रिपोर्ट देने को लेकर नोकझोंक भी हुई। इससे करीब एक घंटे तक अफरातफरी मची रही।
लिखा है पत्र
मशीन अभी गारंटी पीरियड में चल रही है। आपूर्तिकर्ता कंपनी को पत्र लिखा गया है। शनिवार तक मशीन बनने की उम्मीद है।
डॉ. आरके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल