सीतापुर। कृषि सखी रुचि ने कटिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से प्राकृतिक खेती का पांच दिवसीय प्रशिक्षण लिया। इसके बाद अपने खेत में उगाई जाने फसलों की लागत कम करने का प्रयास शुरू किया। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और वानस्पतिक कीटनाशक बनाना शुरू किया। इसका अपनी फसलों पर प्रयोग भी किया। परिणाम उत्साहवर्धक होने पर उन्होंने अपने क्लस्टर के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना शुरू किया। इससे रुचि को खेती करने से अधिक आमदनी भी हो रही है।
बिसवां ब्लॉक के ग्राम अल्लीपुर की रहने वाली रुचि ने स्नातक किया है। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसे सुधारने के लिए वह स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक खेती करने के लिए कृषि सखी बनने के लिए आवेदन किया। इसमें उनका चयन हो गया।
उन्होंने प्राकृतिक खेती पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पहले अपने खेत में उगाई जाने फसलों की लागत कम करने का प्रयास शुरू किया। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, वानस्पतिक कीटनाशक बनाना शुरू किया। इसका अपनी फसलों पर प्रयोग भी किया।
इसके बाद अपने क्लस्टर हरिहरपुर जमरखा के 125 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना शुरू किया। रुचि बताती हैं कि किसान उनकी बात शुरू में तो नहीं सुनते थे। कुछ किसानों को रसायनों का प्रयोग कर नुकसान भी हो रहा था।
वह अब प्राकृतिक खेती की पद्धति को समझकर उसे अपना रहे हैं। कृषि सखी अल्लीपुर के साथ ही आसपास के गांवों पेड़रा, हसनापुर, अटरिया, शाहजलालपुर, हरिहरपुर जमारखा, भीरा और सिकंदरपुर के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक कर रही हैं।
छह बीघा में कर रहीं खेती
कृषि सखी रुचि ने बताया कि वह छह बीघा में खेती कर रही हैं। इसमें से चार बीघा में प्राकृतिक विधि से खेती की जा रही है। इसमें ब्लू काॅर्न, लहसुन, आलू, प्याज, मेथी, मूली आदि की खेती की जाती है। वर्तमान में डेढ़ बीघे में ब्लू कॉर्न की फसल लहलहा रही है। इसके 27 किलोग्राम फूलों की वह बिक्री कर चुकी हैं। इससे उन्हें 12 हजार 100 रुपये मिले हैं।