सीतापुर। अपराजिता की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को औषधीय फसलों की ओर आकर्षित करने के लिए कृषि सखियां गांव-गांव में जागरूकता अभियान चला रही हैं। कृषि सखियां किसानों से सीधे संवाद कर उन्हें अपराजिता की खेती के फायदे, खेती की तकनीक और फसल की देखभाल के बारे में जानकारी दे रही हैं। इस पहल में महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बिसवां ब्लॉक क्षेत्र की कृषि सखी सीता, वंदना, आरती, किरन, गीता आदि की ओर से अपराजिता की खेती की जा रही है। उनका कहना है कि पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय फसलों की खेती अपनाकर किसान अपनी आय के अतिरिक्त साधन विकसित कर सकते हैं। कृषि सखियां गांवों में पहुंचकर किसानों को उपयुक्त बीज के चयन, खेत की तैयारी, जैविक खाद के इस्तेमाल, पौधों की उचित दूरी, सिंचाई और समय-समय पर आवश्यक देखभाल की जानकारी दे रही हैं।
इसके साथ ही कृषि सखियां किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। किसी भी समस्या के समाधान के लिए वह किसानों को कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और अन्य संबंधित संस्थानों से प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन लेने की सलाह भी देती हैं। इससे किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी मिल रही है और वह नई फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।
समय से करें फूलों की तुड़ाई
उद्यान निरीक्षक राजीव गुप्ता ने बताया कि अपराजिता की खेती शुरू करने से पहले किसानों को स्थानीय जलवायु, बीज की गुणवत्ता, उत्पादन लागत और बाजार की मांग की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। फूलों की तुड़ाई सही समय पर करने और उन्हें साफ-सुथरे तरीके से सुखाकर सुरक्षित रखने से उनकी गुणवत्ता बनी रहती है। किसान स्थानीय फूल विक्रेताओं, आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माताओं, नर्सरी संचालकों और अन्य संभावित खरीदारों से संपर्क करके विपणन की संभावनाएं तलाश सकते हैं।