जिले में खादी के दिन बहुरने वाले हैं। वो दिन दूर नहीं जब यहां खादी के थान बनेंगे। इसके लिए यहां राजस्थान से पांच हथकरघा समेत अन्य मशीनें आई हैं। इनके जरिये खादी के वस्त्र बनाए जाएंगे। अभी तक इस जिले में केवल सूत काटने का काम होता था। पर अब उसी सूत से खादी के थान तैयार किए जाएंगे।
स्वदेशी वस्त्र खादी के उत्थान के लिए जिले में श्री गांधी खादी आश्रम लंबे समय से प्रयासरत है, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप यहां पर काम नजर नहीं आ रहा था। यहां पर चरखों से सूत काटने का काम प्रमुख है। बावजूद इसके यहां पर बनाए गए सूत का उपयोग पूरी तरह से यहां पर नहीं हो पाता था।
सूत का उपयोग खादी वस्त्रों के निर्माण में करने के लिए इनको गैर जनपद भेजा जाता था। अब उस सूत का उपयोग इसी जिले में हो सकेगा। वजह, अब सूत के साथ खादी कपड़ों का भी निर्माण आश्रम में ही किया जाएगा। इसको लेकर योजना को मंजूरी भी मिल गई है और पांच हथकरघे भी जिले में भेजे गए हैं।
थान तैयार करने का पूरा सिस्टम आश्रम में लगाया जा रहा है। यहां हथकरघों के अलावा सेमी हावी काटन कलेंडर मशीन, हाइड्रोलिक दाब मशीन व हाइड्रो मशीन, कोन वाइटिंग मशीन भी आई हैं। चरखों से सूत निकालने के बाद उनकी रंगाई, हथकरघों में कपड़ों की बुनाई, धुलाई, फिनीसिंग व प्रेस करने के बाद थान तैयार किया जाएगा।
जिले के लिए यह सबसे ऐतिहासिक पल होगा, जब इस जिले में 56 इंची थान तैयार किया जाएगा और इसे बाजार में उतारा जाएगा। आश्रम के अधिकारियों का कहना है कि जिले में अब तक जो हथकरघे लगे थे, उनसे महज रुमाल, गमछे ही तैयार हो पाते थे। जबकि कुर्र्ता, पायजामा, पैंट-शर्ट कपड़ों का निर्माण यहां नहीं हो पाता था।
जिले में करीब 500 आधुनिक चरखे चल रहे हैं, जिनसे काफी मात्रा में सूत काटने का काम किया जाता है। इन चरखों से निकाला गया सूत, पूरी तरह से जिले में उपयोग में नहीं लाया जा रहा था। खादी के थान के निर्माण के लिए सूत को गैर जनपदों में भेजा जाता रहा है।