जिले के ग्रामीण क्षेत्र में शारदा नदी का बढ़ रहा पानी लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। बीते दो दिनों से क्षेत्र के 16 गांव व करीब 150 बीघा से अधिक जमीन बाढ़ की चपेट में है।
बावजूद इसके वहां मुसीबत से निजात मिलती नजर नहीं आ रही है। आहिस्ता-आहिस्ता पानी बढ़ने से तटीय क्षेत्र के अन्य गांवों पर भी बाढ़ का संकट मंडराने लगा है। प्रशासन की ओर से अभी कोई मदद नहीं पहुंचाई जा रही है।
रेउसा क्षेत्र में बुधवार रात बाढ़ आई थी। गुरुवार सुबह तक क्षेत्र के निर्मल पुरवा, फौजदार पुरवा, कोनी, गोडियन पुरवा आदि 16 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे।
इस क्षेत्र में रहने वाले संतोष कुमार, राम आसरे, मनोज कुमार, जयकरन आदि ग्रामीणों का कहना था कि उम्मीद थी कि शुक्रवार सुबह तक पानी वापस नदी में खिसक जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नदी का पानी आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता ही जा रहा है।
इससे बाढ़ का खतरा टलने के बजाए बाढ़ के विकराल होने के संकेत मिल रहे हैं। इस क्षेत्र में धान, अरहर, मक्का आदि की फसल पानी में बर्बाद होती नजर आ रही हैं। जबकि लौकी, कद्दू, मिर्च, खीरा आदि की फसल लगभग नष्ट हो गई हैं। गन्ने की फसल भी बाढ़ की चपेट में है।
निर्मलपुरवा से लेकर मारूबेहड़ के आगे तक करीब 95 मार्ग बाढ़ की चपेट में हैं। खेतों से गांवों की तरफ आने वाले चकमार्गों ने नाले का रूप ले लिया है। जिन मार्गों से ग्रामीण अपने खेतों की तरफ जाया करते थे, उन मार्गों से अब बाढ़ का पानी आबादी की ओर आ रहा है।
उधर, शारदा, घाघरा व बनबसा बैराज से शुक्रवार को फिर से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में और इजाफा होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे निजात मिलती नजर नहीं आ रही है।
बाढ़ का प्रकोप देखकर शुक्रवार को भी ग्रामीणों का सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन जारी रहा। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र में भी बाढ़ आने जैसे हालात नजर आ रहे हैं। यदि नदी का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो रामपुर मथुरा क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।