सीतापुर। बीमा कराने के कुछ घंटे बाद सड़क हादसे में स्कूटी जल जाने पर क्लेम से इनकार करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस प्राइवेट लिमिटेड को उपभोक्ता को स्कूटी की कीमत, मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा और वाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया है। कुल राशि करीब 85 हजार रुपये है।
संदना थाना क्षेत्र के जैनापुर गांव निवासी बृजेंद्र अवस्थी ने 10 अप्रैल 2024 को मां शीतला देवी हीरो सेल्स से स्कूटी खरीदी थी। वाहन एजेंसी से निकालने से पहले 11 अप्रैल को उसका बीमा कराया गया। उसी दिन कुछ घंटे बाद बृजेंद्र सिधौली-मिश्रिख मार्ग पर स्कूटी से जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटी में आग लग गई और वह जल गई।
बृजेंद्र ने बीमित धनराशि के भुगतान के लिए बीमा कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कंपनी के प्रबंधक ने यह कहते हुए क्लेम देने से मना कर दिया कि बीमा हादसे वाले दिन ही कराया गया था। इसके बाद बृजेंद्र ने अधिवक्ता विजय कुमार गुप्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया। 4 जून 2024 को परिवाद संख्या 87/2024 प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने तर्क रखे और संबंधित दस्तावेज व साक्ष्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए। अभिलेखों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद आयोग की तीन सदस्यीय पीठ ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, सदस्य विभा तिवारी और देवकांत त्रिपाठी की पीठ ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना। अधिवक्ता विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि आयोग ने स्कूटी की कीमत 70,828 रुपये पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए 10 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं।