सीतापुर। शहर के नई बस्ती की एक छात्रा ने स्कूल बंद होने से घर में रहते हुए समय का सदुपयोग कर एक बैटरी से चलने वाली सैनिटाइजर मशीन बनाई है। कक्षा तीन की छात्रा आराध्या के इस प्रयोग से प्रभावित होकर डीआरएम रेलवे ने हरदोई स्टेशन पर टिकट विंडो के पास एक मशीन लगवाई है। छात्रा को इस तरह के प्रयोग आगे भी करते रहने को प्रेरित भी किया है।
मुख्य वाणिज्य निरीक्षक हरदोई के पद पर तैनात शहर के मोहल्ला नई बस्ती निवासी मनीष बाजपेई की 9 वर्षीया बेटी आराध्या ने कोरोना आपदा को अवसर में बदल दिया। स्कूल बंद होने से घर में रहते हुए इस छोटी बच्ची ने अपनी योग्यता को धार देना शुरू किया। दरअसल, आराध्या ने एक ऑटोमेटिक सैनिटाइजर मशीन बनाने का खाका अपने दिमाग में खींचा। उसने गूगल पर सारी जानकारी जुटाई और पिता से उपकरण लाने का अनुरोध किया।
आराध्या के पिता मनीष बताते हैं, जब उसने 6 वॉट की डीसी समरसेबल और 9 वॉट की बैट्री लाने को कहा तब उन्हें अहसास हुआ कि वह वाकई में अपनी सोच को साकार करने के लिए गंभीर है। इस पर सभी जरूरी चीजें लाकर दे दीं। इसके कुछ दिनों बाद जब आराध्या ने एक दिन बनाई गई सैनिटाइजर मशीन दिखाई तो वह हैरान रह गए। प्लास्टिक के डिब्बे में समरसेबल व बैट्री लगाकर मशीन तैयार कर दी गई थी। बाहर एक पाइप व बटन लगा था। बटन दबाते ही पाइप से सैनिटाइजर निकलने लगता।
मनीष ने बताया उसकी योग्यता से प्रभावित होकर एक और मशीन बनवाई। इसी बीच एक सितंबर को दौरे पर आए डीआरएम रेलवे तरुण प्रकाश व कॉमर्शियल डिवीजन के मोनू लूथरा को मशीन दिखाने पर वह भी बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने तत्काल एक मशीन हरदोई स्टेशन की टिकट विंडो के पास लगवाने के बाद उसे चलाकर सभी के हाथ सैनिटाइज कराए।
डीआरएम ने मनीष के जरिए आराध्या को संदेश दिया कि वह इस तरह के प्रयोग आगे भी करती रहे। उसके द्वारा बनाई गई उपयोगी चीजों को रेलवे में प्रयोग किया जाएगा। जिसका रेलवे से उचित मूल्य भी बच्ची को दिलाया जाएगा। मनीष ने बताया जल्द ही सिटी स्टेशन सीतापुर में एक सैनिटाइजर मशीन लगाने की कवायद चल रही है।
हाथ सैनिटाइज करने के लिए इस मशीन को छूना नहीं पड़ेगा। दरअसल, मशीन चलाने का बटन काउंटर के अंदर बैठे रेलवे कर्मचारी के पास लगाया गया है। जब कोई व्यक्ति अपने हाथ पाइप के आगे करेगा तो अंदर से कर्मचारी बटन ऑन कर देगा और एक निश्चित मात्रा में सैनिटाइजर उसके हाथ पर गिर जाएगा। मशीन को अधिक लोगों के संपर्क में आने से बचाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई है।