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Sitapur News: इस्राइल-ईरान युद्ध से ऊनी फाइबर का आयात प्रभावित

Sat, 07 Mar 2026 09:09 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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दरी बुनते कारीगर।
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खैराबाद (सीतापुर)। अमेरिका-इस्राइल व ईरान के बीच छिड़े युद्ध से सीतापुर के दरी उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान व सऊदी अरब समेत कई देशों से ऊनी फाइबर का भारत में आयात प्रभावित हुआ है। इससे ऊनी फाइबर की कीमतों में 25 फीसदी तक का उछाल आया है। ऊनी फाइबर के आयात के साथ दरी के निर्यात पर भी असर पड़ा है। इससे दरी कारोबारी चिंतित हैं।
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सीतापुर में निर्मित दरियों की विदेशों में अलग पहचान है। अमेरिका व खड़ी देशों समेत यूरापीय देशों तक यहां की दरियों का निर्यात होता है। ऊनी दरियों व काॅरपेट के लिए ईरान, सऊदी अरब, सयुंक्त अरब अमीरात, सीरिया, तुर्की, आस्ट्रेलिया आदि देशों से भारत में ऊनी फाइबर का आयात होता है। ऊनी दरियों के अलावा कॉरपेट व ऊनी कपड़े बनाने के लिए ऊनी फाइबर को लेकर भारत इन देशों पर निर्भर है।
राजस्थान बीकानेर ऊल मैटीरियल के निर्माता गिरीश बताते हैं कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने से खाड़ी देशों के एयरपोर्ट व शिपिंग कंपनियों ने बंदरगाहों से यातायात संचालन पर रोक लगा दी है। इससे चार सप्ताह में डिलीवरी होने वाले ऊनी फाइबर भारत में आठ से दस सप्ताह बाद पहुंच पा रहे हैं।
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कई देशों के युद्ध से प्रभावित होने के कारण भारत में आयात किए जा रहे ऊनी फाइबर का इंश्योरेंस कंपनियों ने इंश्योरेंस करने से भी मना कर दिया है। इससे ऊनी फाइबर पर एकाएक 25 फीसदी तक महंगाई बढ़ गई है। इस कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि अगर युद्ध के हालात काबू नहीं हुए तो ऊनी फाइबर का भाव आसमान छू सकता है। इसका सीधा असर यहां के दरी कारोबार पर पड़ना तय है।



कैसे होगा ऊनी दरियों का निर्यात

हाफिजिया आर्ट एंड क्राॅप्ट के निर्यातक हाफिज मोहम्मद अकरम कहते हैं कि ऊनी वस्तुओं के रेट आसमान छू रहे हैं। मंहगा होने के बाद भी युद्ध के चलते ऑर्डर लेट हो रहे हैं। ऊनी वस्तुएं नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ऊनी दरियों के ऑर्डर पूरे करने मे पसीने आ रहे हैं। इतना ही नहीं अमेरिका व यूरोपीय देशों से इसी माह विजिट पर आने वाले आयातकों ने प्रोग्राम कैंसिल कर दिया है। ज्यादा दिन तक युद्ध चला तो समूचे कपड़ा व हस्तनिर्मित दरी उद्योग पर संकट छा जाएगा।




दरी उद्योग पर महंगाई की मार

एनआईसी कंपनी के निर्यातक प्रदीप दीक्षित ने बताया कि इस युद्ध से दरी उद्योग को महंगाई की मार से जूझना पड़ रहा है। सभी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। विदेशों से आयात होने वाले सभी वस्तुओं पर संकट छा गया है। वस्तुओं नहीं मिलेंगे तो दरियां कैसे बन पाएंगी। ऐसे में दरी उद्योग को नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है।
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