सीतापुर। जिला अस्पताल में मरीजों की जांच न करनी पड़े इसके लिए तमाम जतन किए जा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर चिकित्सक ने अपना मोबाइल नंबर ही मिटा दिया, जिससे किसी मरीज को लोकेशन न पता चल सके।
कक्ष के बाहर बैठा कर्मी भी फोन पर बात करने में मशगूल नजर आया। मरीज चार घंटे तक डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। जब सही जानकारी नहीं मिली तो वह 12 बजे के बाद लौट गए।
शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइनें लगी थी। यहां पर मरीज डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। मानपुर से आए आशीष ने बताया कि नौ बजे नंबर लगा दिया था। 11 बजे गए हैं अभी तक डॉक्टर नहीं आए हैं।
मोबाइल नंबर भी पूरा नहीं लिखा है जो संपर्क करके जानकारी कर लें। करीब 80 किलोमीटर दूर चलकर आए गोलोककोडर के मोतीलाल ने बताया कि जानकारी देने वाला कोई नहीं है। मरीजों को कोई जानकारी नहीं दी। इससे मरीज 12 बजे के बाद चले गये। जबकि सीएमएस ने सख्त हिदायत दी थी डॉक्टर मोबाइल नंबर साफ अंकित करें। सीएमएस डॉ. आरके सिंह ने बताया मामले को दिखवाया जाएगा।
इमरजेंसी को बना दिया ओपीडी, परेशान गंभीर मरीज
जिला अस्पताल के चिकित्सक मनमानी पर उतारू हैं। जहां मन आया, वहीं बैठकर इलाज शुरू कर दिया। शुक्रवार को इमरजेंसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. इंदेश वर्मा बैठे हुए थे। उन्होंने वहीं पर मरीजों को देखना शुरू कर दिया। इसकी वजह से इमरजेंसी के अंदर लाइनें लग गईं। गंभीर मरीज आने पर वह कक्ष के अंदर नहीं घुस सके। इससे यहां पर अफरातफरी मच रही। वहीं हड्डी रोग विभाग में डॉक्टर उनके आने का इंतजार ही करते रहे।
दो घंटे तक नदारद रहा स्टॉफ
चिल्ड्रेन वार्ड के पड़ोस में ही पोषण पुनर्वास केंद्र बना हुआ है। इस केंद्र में अति कुपोषित बच्चे भर्ती किए जाते है। शुक्रवार दोपहर को करीब दो घंटे तक कोई भी यहां पर स्टाफ मौजूद नहीं मिला। कई बच्चों के परिजन बच्चों की दवाई व खाने पीने की जानकारी लेना चाहती थी। लेकिन डॉक्टर न होने के चलते वह काफी देर तक परेशान रहे।
बुखार से पीड़ित बच्ची की मौत
सीतापुर। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती एक बच्ची की शुक्रवार को मौत हो गई। चिल्ड्रेन वार्ड में बिसवां के चांदपुर निवासी शिवानी डेढ़ साल को एक दिन पहले भर्ती किया गया था। शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। डॉक्टर ने बताया शिवानी को बुखार के साथ झटके आ रहे थे।