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बेकाबू लहरों की चपेट में सौ और गांव

Mon, 07 Aug 2017 11:20 PM IST
amar ujala
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उफनाई घाघरा व शारदा की बेकाबू लहरों ने एक सैकड़ा और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ का पानी अब 400 गांवों में तबाही मचाने जा पहुंचा है। इन गांवों में रहने वाली करीब पचास हजार की आबादी लहरों के भंवर में बुरी तरह से फंसी हुई है।
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हर तरफ पानी ही पानी होने से बाढ़ में फंसे लोग न पेट की आग बुझा पा रहे हैं और न हलक की प्यास। गांजर के इन बाढ़ प्रभावतिों की आंखें नदी का रौद्र रूप देख नहीं, बल्कि अपने बच्चों की भूख-प्यास से नम हो रही हैं। सोमवार को 5 आशियाने बाढ़ के पानी में समा गए।

वहीं 80 घर कटान के मुहाने पर जा पहुंचे हैं। अब तक करीब दो हजार बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समा चुकी है। प्रशासन की ओर से बाढ़ में फंसे ग्रामीणों तक मदद न पहुंचने से हालात भयावह होते जा रहे हैं। 
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रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते सोमवार को शाहपुर बजहा, कोलिया छड़िया, लालपुर, राजापुर कला, हरीपुर, मुजेहना, रंडाकोडर, ठेकेदारपुरवा, पंडितपुरवा, हरीपुर, भदीमपुरवा, नई बस्ती, महेेशपुर, चापर, बनियनपुरवा सहित लगभग एक सैकड़ा गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

लिहाजा, रविवार तक बाढ़ से घिरे 300 गांवों की संख्या सोमवार को बढ़कर 400 पहुंच गई है। मेवड़ी छोलहा के मजरा भदिमरपुरवा में मुरली, अजीज, केशन, घूरू व मोहन के आशियाने पूरी तरह से शारदा नदी में समा गए हैं।

इसी गांव के हरेराम, पटवारी, हरीलाल, मुन्नीलाल के अलावा करीब 40 मकान तथा पासिनपुरवा में रामकुमार, गोकरन, महिपाल व दिलीप सहित लगभग 40 मकान कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं। सड़कों व गलियारों पर बाढ़ का पानी हिलोरें मार रहा है।

आवागमन पूरी तरह से ठप है। कुछ ग्रामीण किसी तरह नाव पर सवार होकर सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच सके हैं। सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने के बावजूद इन गांवों में पचास हजार से ज्यादा की आबादी घरों में कैद होकर रह गई है। घरों के भीतर तक पानी भर जाने से इनके पास न राशन है और न खाना बनाने का इंतजाम।

यह लोग प्रशासन की ओर से मदद पहुंचने के इंतजार में दिन काट रहे हैं। प्रशासन बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में राहत पहुंचाने के हवा-हवाई दावे कर रहा है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण बताते हैं, कि दो-चार गांवों को छोड़कर बाकी किसी गांव में राहत तो दूर अभी तक कोई हाल जानने नहीं पहुंचा है। 
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