सीतापुर/महमूदाबाद। होली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों में महिलाएं आलू के चिप्स, पापड़, कचरी आदि कई उत्पाद बनाने में जुटी हुई हैं। लेकिन उनकी तैयारियों में बंदरों ने खलल डाल कर रखा है। छतों पर पापड़ सूखते समय अचानक बंदर धावा बोल देते हैं और सामान उठा ले जाते हैं।
इससे गृहणियों की नाक में दम है। होली में महज कुछ दिन बचे हैं। ऐसे में महिलाएं जल्द से जल्द सभी तैयारियों को पूरा करने में लगी हुई हैं। बार-बार बदल रहे मौसम को लेकर वह और भी चिंतित है कि बारिश होने से उनकी मेहनत जाया न हो जाए। ऐसे में वह लगातार छतों पर पापड़, चिप्स आदि होली में पकाए जाने वाले व्यंजन बनाने में लगी हुई हैं। लेकिन बंदर के आतंक से वह परेशान हैं।
छतों पर पापड़ बनाने से लेकर उनके सूखने तक एक सदस्य को लाठी लेकर पहरा देना पड़ता है। पलक झपकते ही बंदर छतों पर हमला करते हुए लोगों के पापड़, चिप्स को कच्चा ही खा जाते हैं। इतना ही नहीं अगर बंदर छतों पर सिर्फ महिलाओं को देख लेते हैं तो उनपर हमला बोल कर उन्हें जख्मी भी कर देते हैं।
आंगन में सुखाने पड़ते हैं पापड़
गृहणी मीना देवी बताती है कि बाजार के पापड़ क्वालिटी में अच्छे नहीं होते हैं। इसलिए घर पर ही पापड़ बनाने पड़ते है, लेकिन छत पर बंदरों का बहुत डर लगा रहता है। इसलिए जब घर में पुरुष सदस्य होता है तभी छत पर पापड़ डाले जाते हैं। नहीं तो नीचे आंगन में ही पापड़ सुखाने पड़ते हैं।
मौसम के कारण भी हो रही दिक्कत
रिंकी बताती है होली जल्द पड़ने के कारण मौसम साथ नहीं दे रहा है। ऐसे में धूप निकलने का इंतजार करना पड़ता है। जिस दिन थोड़ी धूप निकलती है तो उस दिन बंदर झुंड में आकर पापड़ खा जाते हैं। इतने बंदरों को देखकर अकेले उनको भगाने की हिम्मत भी नहीं होती है।
पति की करानी पड़ी छुट्टी
लेखा गुप्ता ने बताया कि पापड़ बनाने के उनको अपनी पति की छुट्टी करानी पड़ी। वह भी इसलिए कि बंदरों से बचाव हो सके। भरी धूप में उन्होंने पापड़ बनाए, फिर भी अब तक उनके चिप्स नहीं बन सके हैं। क्योंकि उनके पति को सिर्फ एक दिन की छुट्टी ही मिल पाई।
बंदरों के डर से नहीं बनाए पापड़
लक्ष्मी गुप्ता ने बताया कि इस बार उन्होंने धूप में सुखाने वाली कोई भी चीज नही बनाई है। उन्होंने बताया कि बंदरों के कारण वह अधिकांश सामान बाजार से ही खरीदेंगीं, ताकि बंदरों से बचाने का कोई झंझट नहीं रहेगा और मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी।