जिला पंचायत सदस्यों की बैठक के दौरान शनिवार को प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी व बिसवां विधायक रामपाल यादव आपस में भिड़ गए। दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।
राज्यमंत्री के पुत्र ने बिसवां विधायक समर्थकों को देख लेने की धमकी भी दे डाली। मौके की नजाकत को देख राज्यमंत्री अपने समर्थक जिपं सदस्यों के साथ सदन से बाहर निकल गए। बाद में सर्वसम्मति से कई समितियां गठित की गईं।
जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों की 23 जुलाई को बोर्ड बैठक रखी गई थी। बाकायदा अपर मुख्य अधिकारी द्वारा एजेंडा भी जारी किया गया था, इनमें भंग समितियों के गठन समेत राज्य वित्त एवं 13वें वित्त आयोग मद के कार्य प्रस्ताव शामिल थे।
शनिवार सुबह कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र यादव, बिसवां विधायक रामपाल यादव, सीडीओ रवींद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट राम सेवक द्विवेदी समेत जिला पंचायत सदस्य पहुंच गए थे। सबसे पहले अपर मुख्य अधिकारी घनश्याम राय ने बोर्ड बैठक की कार्रवाई सदन में रखनी शुरू की।
कार्रवाई शुरू होते ही कारागार राज्यमंत्री ने पिछली बैठक में दिए गए प्रस्तावों के शामिल न होने पर नाराजगी जताई। जवाब मिला कि पिछली बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखे गए थे पर बजट के अभाव में रह गए थे। यह सुनकर राज्यमंत्री का पारा चढ़ गया। वह बोले उनके प्रस्तावों को शामिल नहीं किया जा रहा है।
इसी बीच राज्यमंत्री व बिसवां विधायक के बीच नोक-झोंक शुरू हो गई। राज्यमंत्री ने बिसवां विधायक रामपाल यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने पूरा जिला लूटा लिया है। अब जिला पंचायत को लूटने आ गए। भ्रष्टाचार की वजह से पार्टी ने निष्कासित कर दिया।
बिसवां विधायक रामपाल यादव ने भी राज्यमंत्री पर कई गंभीर आरोप जड़े। बोले मिश्रिख इलाके में हरियाली नष्ट कर डाली। इस पर समर्थक भी उत्तेजित होने लगे। हंगामे के बीच राज्यमंत्री सदन से बाहर निकल आए। हालांकि बाद में जिला पंचायत विकास कार्यों का बजट पास कर समितियां गठित की गईं।