इन दिनों जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ से हाल-बेहाल हैं। चिकित्सक को दिखाने से लेकर दवा लेने तक को संघर्ष करना पड़ रहा है। शुक्रवार को ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में मरीजों की भरमार थी। अव्यवस्था ऐसी थी कि जिन डॉक्टर्स को इमरजेंसी ड्यूटी में लगाया गया था, उन्हें ओपीडी भी संभालनी थी।
नतीजा इमरजेंसी में एक तरफ जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीज पहुंच रहे थे, तो दूसरी तरफ ओपीडी के मरीज भी लाइन लगाए खड़े थे। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की समझ में ही नहीं आ रहा था, कि वो ओपीडी करे या फिर इमरजेंसी में नाजुक हालत में पहुंचे मरीजों को देखे।
कुछ डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे, तो लाइन में लगे लोग शोर मचा रहे थे। तमाम ऐसे भी मरीज थे, जो लाइन से निकल कर बाहर फर्श पर ही बैठ गए। डॉक्टर कभी गंभीर रोगी को देखता, तो कभी लाइन में लगे ओपीडी के मरीज के पर्चे पर दवाएं लिखता। मोहल्ला मुंशीगंज निवासी शैलेश दीक्षित (58) बेहाल हालत में फर्श पर लेटे थे। उनको तेज बुखार था।
परिवारीजनों ने बताया कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक भीड़ लगी है। कुछ ऐसा ही हाल पिसावां के पड़रिया निवासी जावित्री देवी (60) का था। वे बीमार थीं, लाइन में लग नही सकती थीं, इसलिए फर्श पर ही लेट गई और अपनी बारी का इंतजार करने लगीं। दवा की खिड़की पर भी भीड़ लगी हुई थी। लोग एक-दूसरे गिर रहे थे। जिला अस्पताल में जैली मौजूद नहीं थीं। डॉक्टर मरीज को मेडिकल स्टोर से जैली लाने के लिए कह रहे थे।