सीतापुर। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षिकाओं व कर्मचारियों का मानदेय से कट रहा ईपीएफ का रूपया डेढ़ साल से उनके खातों में जमा नहीं हो रहा। शासन भी अपना अंशदान प्रत्येक साल दे रहा है। ईपीएफ खाते में कटौती व अंशदान न जमा होने से ब्याज भी नहीं मिल पा रहा है। इससे लाभार्थी अफसरों के चक्कर काटते घूम रहे हैं।
जिले में 20 कस्तूरबा बालिका विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में पार्टटाइम शिक्षिकाएं, एकाउंटेंट, चपरासी, रसोईयां व चौकीदार कार्यरत हैं। 2019 में प्रदेश सरकार ने 15 हजार से कम मानदेय वाले शिक्षिकाओं व कर्मचारियों के मानदेय से ईपीएफ की कटौती करने का आदेश दिया था।
प्रत्येक के मानदेय से हर माह 12 प्रतिशत ईपीएफ की कटौती होने लगी और शासन से प्रति कर्मचारी 13 प्रतिशत के हिसाब से अंशदान जमा करने का बजट आने लगा। हर कर्मचारी का खाता खुलवा दिया गया और इसमें जिले में करीब 180 शिक्षिकाओं व कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती हो रही है। लेकिन मानदेय से कटौती व शासन से मिलने वाला अंशदान शिक्षक व कर्मचारी के ईपीएफ खाते में जमा नहीं किया जा रहा है। शिक्षिकाओं व कर्मचारियों ने कई बार मांग उठाई, लेकिन नतीजा सिफर रहा है।
बीएसए से लगाई गुहार
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के 30 से अधिक शिक्षिकाओं व कर्मचारियों ने बीएसए को शिकायती पत्र दिया है। इसके जरिए कहा गया कि मानदेय से लगातार कटौती हो रही है तो आखिर यह बजट कहां जा रहा है।ईपीएफ खाते में पैसा न जमा होने से ब्याज का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इन लोगों का कटता है ईपीएफ
प्रत्येक कस्तूरबा विद्यालय में तीन पार्ट टाइम शिक्षिकाएं, एक एकाउंटेंट, एक चौकीदार, एक चपरासी, तीन रसोईयां यानि कुल नौ के मानदेय से प्रतिमाह कटौती हो रही है। जिले में इस तरह करीब 180 कर्मचारियों की राशि जमा नहीं हो रही है।
डेढ़ साल से अगर धनराशि ईपीएफ में जमा नहीं हो रही है ऐसी जानकारी नहीं है। हाल ही में चार्ज लिया है। इस मामले को दिखवाया जाएगा। जल्द ही इनके ईपीएफ खातों में राशि जमा कराई जाएगी।
सुनील मिश्रा, वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा