गांजर में उफनाई नदियों का सितम कम नहीं हो रहा है। बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी से घाघरा और शारदा नदियां उफान पर हैं। लगातार यहां की नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। लहरपुर क्षेत्र के सोंसरी गांव के निकट नदी का पानी तेजी से बाहर आ गया है। इससे तटीय इलाके में बसी आबादी में हलचल तेज हो गई है।
रेउसा क्षेत्र में पासिन पुरवा गांव में एक घर कटकर शारदा नदी में बह गया है। उधर, बैराजों से गुरुवार को सवा चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जब आबादी की ओर पहुंचेगा तो हालात और खराब हो सकते हैं।
रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार शारदा के जलस्तर में बुधवार रात उफान देखने को मिला है।
पासिनपुरवा म्योड़ी छोलहा निवासी रामतीरथ का घर कटकर शारदा नदी में बह गया है। गांव के महिपाल, रामकुमार, किशोरी लाल, हेरई, देशराज, अमेरिका, जगन्नाथ के घर कटान के मुहाने पर हैं। इस पर लोगों ने घरों को खाली कर दिया है। लहरपुर क्षेत्र में सोंसरी गांव के निकट शारदा का पानी गांवों के गलियारों में आने लगा है। नाले उफना चले हैं।
ऐसे में जल्द ही भदफर मार्ग बाढ़ की चपेट में आ सकता है। रेउसा क्षेत्र में एक सप्ताह बाद भी हालत नहीं सुधरे हैं। इस क्षेत्र में 300 से अधिक गांव घाघरा की बाढ़ की चपेट में हैं। बुधवार देर रात से जलस्तर में गिरावट शुरू हुई थी। गुरुवार दोपहर तक करीब एक से डेढ़ फीट पानी घट गया था। इससे बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र की पक्की सड़कों से पानी हट गया था, लेकिन दोपहर बाद जलस्तर में फिर से इजाफा होने लगा।
स क्षेत्र में सैकड़ों परिवार पक्के मकानों की छतों, सरकारी स्कूलों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। बहुत लोगों ने पेड़ों पर मचान तैयार कर, परिवार को उसके ऊपर बैठा रखा है। रेउसा क्षेत्र का करीब 85 फीसदी हिस्सा बाढ़ का दंश झेल रहा है। जिसकी वजह से लोगों को सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है। पचीसा टापू पर फंसे 200 परिवारों को एक सप्ताह बाद भी बाहर निकाला नहीं जा सका है।
यह अलग बात है, कि प्रशासन मदद के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो, पचीसा टापू पर जीवन सबसे अधिक खतरे में है। टापू बाढ़ की चपेट में है, अगर सैलाब का बहाव तेज हुआ, तो इस टापू पर मौजूद परिवारों व जानवरों को बचा पाना बेहद मुश्किल होगा। बाढ़ की हलचल रेउसा कस्बे में भी देखने को मिल रही है।
रेउसा कस्बे से बाढ़ का पानी महज डेढ़ किलोमीटर दूरी पर मौजूद है। इससे रेउसा कस्बे में भी बाढ़ का दहशत साफ देखी जा रही है। गुरुवार को शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से 439945 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जब यह पानी सीतापुर की सीमा से गुजरेगा, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। इस बार शारदा नदी के तटीय इलाकों में भी बाढ़ के खतरे का अलार्म बजता नजर आ रहा है।