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दुनिया भर में बढ़ रही हिंदी प्रेमियों की संख्या

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hindi diwas - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। शहर के लालबाग पार्क स्थित हिंदी सभा के नरोत्तम सभागार में सोमवार को हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी सेवियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यहां साहित्यकारों व हिंदी सभा के पदाधिकारियों की मौजूदगी में कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए हिंदी सेवियों का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम से लोगों को ऑनलाइन भी जोड़ा गया।
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वरिष्ठ साहित्यकार व हिंदी सभा के संरक्षक रमारमण त्रिवेदी ने कहा हिंदी दिवस सही मायने में हिंदी की महानता के प्रचार-प्रसार का पावन पर्व है। हिंदी सभा के अध्यक्ष आशीष मिश्रा ने कहा आज भले ही हमारे देश में ही कुछ लोग हिंदी के उपयोग को लेकर बेवजह विवाद खड़ा कर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास करते हैं। लेकिन हर भारतीय के लिए गर्व की बात यह है कि दुनिया भर में अब हिंदी को चाहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनसंपर्क के लिए हिंदी को ही सबसे उपयोगी भाषा मानते थे। वर्ष 1917 का एक ऐसा किस्सा सामने आता है, जब कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन के मौके पर बाल गंगाधर तिलक ने राष्ट्रभाषा प्रचार संबंधी कॉन्फ्रेंस में अंग्रेजी में भाषण दिया था। गांधी जी ने उनका वह भाषण सुनने के पश्चात उन्हें हिंदी का महत्व समझाते हुए कहा था कि वह ऐसा कोई कारण नहीं समझते कि हम अपने देशवासियों के साथ अपनी ही भाषा में बात न करें। गांधी जी ने कहा था कि अपने लोगों के दिलों तक हम वास्तव में अपनी ही भाषा के जरिए पहुंच सकते हैं।
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मानस चंदन पत्रिका के संपादक डॉ. सुनील सारस्वत ने कहा कि विश्व भर की भाषाओं का इतिहास रखने वाली संस्था एथ्नोलॉग के अनुसार चीनी और अंग्रेजी भाषा के बाद हिंदी दुनिया भर में सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा है। अमेरिका के अलावा यूरोपीय, एशियाई देशों और खाड़ी देशों में भी हिंदी का तेजी से विकास हो रहा है। कार्तिकेय शुक्ल ने बताया हिंदी को विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार विश्व की 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक माना गया है।
साहित्य सुधा मंच के अध्यक्ष साहित्यकार तुषार मिश्र ने कहा हिंदी की बढ़ती ताकत को महसूस करते हुए ही एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, ओएलएक्स आदि दुनिया की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियां हिंदी जानने वाले ग्राहकों तक अपनी ज्यादा से ज्यादा पहुंच बनाने के लिए ही हिंदी में अपने ऐप लेकर आ चुकी हैं। हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ाने को लेकर वक्ताओं ने अपनी चिंताएं भी रखीं। सोशल मीडिया में हिंदी को तोड़ मरोड़ कर कुछ लोगों द्वारा लिखने पर हिंदी सभा मे चिंता भी दिखाई दी।
कार्यक्रम में हिंदी सेवियों रामकृष्ण पांडेय, मुजीब सीतापुरी, तुषार मिश्रा, अनुपमा अवस्थी, रमाशंकर मिश्र, अरुण शर्मा बेधड़क, अभिषेक बाजपेयी, सतीश चंद्र वर्मा, जीएल गांधी, सुधांशु त्रिवेदी, सुवर्णा मिश्रा, गंगास्वरूप मिश्र व नेतराम शास्त्री का सम्मान किया गया।
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