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...अरे इस बार आरक्षण ने अरमानों पर फेर दिया पानी

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सीतापुर के सिधौली में चुनावी चर्चा करते ग्रामीण। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
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सिधौली (सीतापुर)। तहसील क्षेत्र के मनिकापुर दुकान पर बैठे कुछ लोग चाय की चुस्कियों के साथ चुनावी चर्चा कर रहे थे। इसी बीच मनिकापुर निवासी लगभग 80 वर्षीय प्रेम बीर सिंह ने कहा कि इस बार तो ग्रामपंचायतों में चुनावी सरगर्मी देखने को नहीं मिल रही है, क्योंकि आरक्षण ने सभी के अरमानों पर पानी ही फेर दिया है। इतना सुनते ही किरतापुर निवासी रघुनाथ से रहा नहीं गया और हाथ ऊपर करते हुए कहा कि ‘नाही, दादा अबकी बार तो बहुत बढ़िया होई रहा है। काहे की सबका कौन अपना है, कौन पराया। सबका आजमाएं का मौका तो मिल गवा है। गांव के लोगों को भी समझ में आय गया कि कौन हमार है कौन विरान।’ अपनी बात पूरी नहीं कर पाए की सरसौली निवासी रामपाल तपाक से बोले ‘ यहु तुम कैसैय कहय देहु इह तनक आरक्षण मैहिया तो गांव के कुछ लोग तौ बिलाय गैय, पहलिन सीट होई गई तो लाखौ खर्च करिकै अब बहारी भूमि पर बैठिए हैं।’
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चुनाव की चर्चा चल ही रही थी, इसी बीच वहीं पर कुचौरा बंगला निवासी राकेश कुमार यादव आ धमके। चाय वाले से चाय का गिलास हाथ में लेते हुए बोल पड़े, ‘सब जन सुनव अबकील बार तौ कौन चुनाव में लड़िहै, यहिका विश्वास तौ गांवन के लोग जनव को नाहि होई रहा है। काहे तेने कबहु हरिजन, कबहु सामान्य होई तेन वोटरों का बिस्वास्य नहि होइ रहऊ है।’ यह चर्चा हो ही रही थी कि जलालाबाद निवासी बुजुर्ग बलई राम ने कहा, ‘सब गावन के लोग जन अब समझै लगन है कि पहृले तौ सरकार का आदेश फिर अब कोर्ट का जज का निर्णय होई गया है, तौ अब सीट याहि रही इसका प्रथम सबके मनव से दुरु होई गंवा है।’
सरसौली निवासी बुजुर्ग रामसेवक से भी रहा नहीं गया और तेज आवाज में हाथ की उंगली उठाते हुए कहा, ‘सब कोऊ इन बातौव में का है उलझै रहे, हव अरे सीट तौ चाहै जो होऊ अपन अपन वाट समझबूझ का बिकासव करै वाले प्रत्याशी को चुनै। नहि तौ बादिम पछितैहियो।’ सरसौली निवासी मैकूलाल बोले कि ‘विकास की बात तो सबय करत हैं, पर जीतैय कै बाद कौनऊ नजर नाहीं आवत है। वाट लेबै खातिर तो घर.घर सबैयकै पैलगि करि रहे हैं। पद पाइ कै कहां कवनो सलाम नाही करत है।’ इतना सुनते हैं धीमे-धीमे चाय की चुस्की ले रहे और सबकी बात सुन रहे खुशीराम से रहा नहीं गया, बोले ‘चुनाव की जौ बातै सबकोउ कै रहे हैं। इससै कौनऊ फायदा होना नाहि है, सबय जन हमारि सुनव और चर्चा अब बंद करऊ शाम होईगैहै, वाट सोचय कै देहेव।’
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